UP News : अयोध्या के राम मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है. विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र को लेकर 9 पेज का पत्र जारी किया है. पत्र में उन्होंने मंदिर निर्माण के दौरान लिए गए फैसलों और समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. चंपत राय के मुताबिक, मंदिर निर्माण से जुड़े अधिकांश महत्वपूर्ण फैसले मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में लिए जाते थे. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में बाद में बदलाव किए गए और नृपेंद्र मिश्र के फैसलों को प्राथमिकता दी गई.
नृपेंद्र मिश्र की पसंद के लोगों को समिति में शामिल किया गया
चंपत राय ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण समिति में नृपेंद्र मिश्र की पसंद के लोगों को शामिल किया गया था. उनका दावा है कि इनमें से कुछ लोग छह साल के दौरान केवल एक-दो बार ही अयोध्या आए. उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में समिति के अन्य सदस्यों के सुझावों और फैसलों को अपेक्षित महत्व नहीं मिला. चंपत राय के अनुसार, मंदिर निर्माण से जुड़ा कोई भी महत्वपूर्ण काम समिति की प्रक्रिया से बाहर नहीं था, लेकिन बाद के निर्णयों में अध्यक्ष की भूमिका प्रभावी रही.
L&T को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी
पत्र में चंपत राय ने मंदिर निर्माण से जुड़ी कंपनियों का भी जिक्र किया है. उनके अनुसार, नृपेंद्र मिश्र के सुझाव पर लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी. वहीं, परियोजना प्रबंधन सलाहकार के तौर पर टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) को जिम्मेदारी दी गई. अन्य भवनों के डिजाइन और निर्माण से जुड़े कार्य नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म को दिए जाने की बात भी पत्र में कही गई है.
राम मंदिर निर्माण की पूरी कहानी बताने का दावा
चंपत राय ने अपने 9 पेज के पत्र में राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण और मौजूदा दर्शन व्यवस्था तक का विस्तृत ब्यौरा दिया है. उन्होंने 1528 में बाबर की सेना द्वारा राम जन्मभूमि मंदिर तोड़े जाने के दावे से लेकर लंबे समय तक चले आंदोलन का उल्लेख किया. इसके बाद 1949 में विवादित स्थल पर रामलला की मूर्तियां रखे जाने और 1950 से 1989 के बीच दाखिल किए गए प्रमुख मुकदमों का भी जिक्र किया.
40 दिनों तक चली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
चंपत राय ने बताया कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की थी. इसके लिए पूर्व न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की मध्यस्थता समिति बनाई गई थी. मार्च से जुलाई 2019 तक बातचीत चली, लेकिन समाधान नहीं निकल सका. इसके बाद 6 अगस्त 2019 से सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मामले की नियमित सुनवाई शुरू की. करीब 40 दिनों तक चली सुनवाई के बाद 9 नवंबर 2019 को सर्वसम्मति से फैसला सुनाया गया.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बना ट्रस्ट
पत्र के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया. इसमें 15 सदस्यों का प्रावधान किया गया था. चंपत राय ने बताया कि ट्रस्ट में संतों, विशेषज्ञों और अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया. मंदिर निर्माण समिति की जिम्मेदारी पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को दी गई. उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा को 1986 में अशोक सिंघल ने चुना था और बाद में मंदिर निर्माण की योजना में उन्हें ही बरकरार रखा गया.
रोजाना 75 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का दावा
चंपत राय ने मंदिर की मौजूदा दर्शन व्यवस्था की भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रोजाना 75 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं. उनके मुताबिक, महाकुंभ के दौरान प्रतिदिन तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा किया गया. रामलला के दर्शन के लिए कुल आठ लाइन बनाई गई हैं, जिनमें एक विशिष्ट दर्शन, एक सुगम या व्हीलचेयर दर्शन और छह सामान्य लाइन शामिल हैं.
VIP दर्शन के दौरान भी सामान्य श्रद्धालुओं के लिए दर्शन जारी
चंपत राय के अनुसार, अलग-अलग श्रेणियों के श्रद्धालुओं के लिए अलग रास्ते बनाए गए हैं, जिससे क्रॉसिंग की स्थिति नहीं बनती. VIP दर्शन के दौरान भी सामान्य श्रद्धालुओं का दर्शन जारी रहता है. राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और न्यायाधीशों के लिए अलग व्यवस्था होने की बात भी उन्होंने पत्र में कही है. असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त व्हीलचेयर उपलब्ध कराने का दावा किया गया है.
ट्रस्ट की आर्थिक व्यवस्था पर भी दी जानकारी
पत्र में राम मंदिर ट्रस्ट की आर्थिक व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है. चंपत राय ने दावा किया कि ट्रस्ट के बैंक खातों में चेकबुक का इस्तेमाल नहीं किया जाता और भुगतान बैंक ट्रांसफर के जरिए किए जाते हैं. उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के खाते SBI, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं. ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का आंतरिक और वैधानिक ऑडिट कराया जाता है. वैधानिक ऑडिट दिल्ली की फर्म वी. शंकर अय्यर द्वारा किए जाने की बात भी पत्र में कही गई है.
चंपत राय के पत्र से फिर उठे सवाल
चंपत राय का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं. इससे पहले चंपत राय ने ट्रस्टी अनिल मिश्र को लेकर भी पत्र जारी कर गंभीर आरोप लगाए थे. हालांकि, नृपेंद्र मिश्र को लेकर चंपत राय द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस उपलब्ध सामग्री में सामने नहीं आई है. इसलिए पत्र में लगाए गए आरोपों को फिलहाल चंपत राय के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
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