"मोबाइल ने बर्बाद कर दिया मेरा बेटा" AQIS मॉड्यूल में फंसे मकसूद के पिता का छलका दर्द, एटीएस की रडार पर 5-6 संदिग्ध

अल कायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार मकसूद के पिता अब्दुल कुद्दूस ने जेल में अपने बेटे से मुलाकात की. पिता ने बेटे की गिरफ्तारी पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि कैसे मोबाइल के ज़रिए वह गलत संगत में पड़ गया.

Maqsood Ali AQIS: अल कायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) मॉड्यूल मामले में यूपी एटीएस द्वारा गिरफ्तार मकसूद अली से लखनऊ जेल में उसके पिता अब्दुल कुद्दूस ने मुलाकात की है. एटीएस की जांच में मकसूद के डिजिटल नेटवर्क, खुद बनाए ऐप के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क और बम बनाने से जुड़ी जानकारी हासिल करने जैसी कई बेहद गंभीर बातें सामने आई हैं.

गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर लखनऊ गए थे अब्दुल कुद्दूस

अब्दुल कुद्दूस ने बताया कि कंप्यूटर में काम करने वाले लोगों के जरिए उन्हें बेटे की गिरफ्तारी की सूचना मिली थी. जानकारी मिलते ही वह बुधवार को लखनऊ के लिए रवाना हो गए. रात में लखनऊ पहुंचने के बाद पॉलीटेक्निक क्षेत्र स्थित एक होटल में ठहरे. अगले दिन जिला कारागार पहुंचकर उन्होंने कर्मचारियों को बेटे से मिलने की जानकारी दी. आधार कार्ड की जांच के बाद मुलाकात की पर्ची दी गई और निर्धारित समय पर मकसूद से उनकी मुलाकात हुई. पिता के अनुसार, बातचीत के दौरान मकसूद भावुक हो गया और ज्यादा कुछ नहीं बता सका. जेल में मुलाकात के दौरान पुलिस ने उनसे कोई पूछताछ नहीं की.

आजमगढ़ के युवक से संपर्क को लेकर जताई आशंका

अब्दुल कुद्दूस के अनुसार, बातचीत के दौरान मकसूद ने बताया कि मोबाइल के जरिये उसका आजमगढ़ के एक युवक से संपर्क हुआ था. इसके बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और मकसूद उसके संपर्क में रहने लगा. पिता का कहना है कि उसी युवक के संपर्क में आने के बाद बेटे की गतिविधियां बदलने की आशंका है. हालांकि, इस युवक की पहचान और उसकी भूमिका को लेकर जांच जारी है.

पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क वाले ऐप की भी जांच

मकसूद की गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस की जांच में उसके ऑनलाइन नेटवर्क को लेकर भी कई जानकारियां सामने आई हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, मकसूद जिस ऐप के जरिये पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में रहता था, उसे उसने खुद तैयार किया था. वह इस ऐप को सामान्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अलग रखने की कोशिश कर रहा था, ताकि उसकी गतिविधियों का आसानी से पता न चल सके. जांच के दौरान मकसूद के मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से कई चैट और दूसरी सामग्री भी मिली है. इनमें बम बनाने से जुड़ी जानकारी हासिल करने की बातचीत शामिल होने की बात सामने आई है. एटीएस अब इन चैट की पड़ताल कर रही है कि यह जानकारी उसने किससे हासिल की थी और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था. जांच एजेंसी मकसूद के सोशल मीडिया संपर्क में रहे यूपी और आसपास के प्रदेशों के करीब 100 लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है. इनमें पांच से छह संदिग्धों को चिह्नित किया गया है.

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By कोमल अग्रवाल

कोमल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न विषयों पर समाचार एवं लेख लिखती हैं. इससे पहले उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में इंटर्नशिप एवं कार्य अनुभव प्राप्त किया है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और वीडियो एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई की है. कोमल तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता में विश्वास रखती हैं तथा सरल, सटीक और प्रभावी समाचार लेखन को प्राथमिकता देती हैं.

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