Agra News: जेल में सजा काट रहे कैदी रोशन करेंगे सैकड़ों घरों की दिवाली, आगरा में बन रहे हैं ये खास दीपक

आगरा जिला जेल में सजा काट रहे कैदी इन दिनों गाय के गोबर से दीपक तैयार कर रहे हैं. करीब हफ्ते भर से यह बंदी दीपक बना रहे हैं और दीपावली तक करीब एक लाख दीपकों का निर्माण करने की तैयारी है. इसके लिए गाय के गोबर का प्रयोग कर रहे हैं.

Agra News: आगरा की जिला जेल ने दीपावली से पहले एक पहल शुरू की है. जेल के बंदी गाय के गोबर से दीपावली पर घरों को रोशन करने वाले दीपकों का निर्माण कर रहे हैं. करीब हफ्ते भर से यह बंदी दीपक बना रहे हैं और दीपावली तक करीब एक लाख दीपकों का बंदी निर्माण करेंगे. इसके लिए वह गाय के गोबर का प्रयोग कर रहे हैं.

गाय के गोबर से बनाए जा रहे हैं दीपक

आगरा जेल में करीब 6 से 7 बंदी कई दिनों से दीपकों का निर्माण कर रहे हैं. गाय के गोबर से दीपक बनाए जा रहे हैं. दरअसल, जिला जेल में एक गौशाला स्थित है जिसमें 80 से 85 गाय पाली जाती हैं. इन सभी गाय से जो गोबर एकत्रित किया जाता है उस गोबर का जिला जेल पहले भी कई बार प्रयोग कर चुकी है. इससे पहले जिला जेल के कैदियों ने गाय के गोबर से ही लकड़ियों का निर्माण किया था जिनकी बिक्री भी गई थी.

गायत्री शक्तिपीठ में सुपरिटेंडेंट ने देखें थे ये दीपक

जेल सुपरिटेंडेंट पीडी सलोनिया ने बताया कि, जिला जेल में मौजूद बंदी कई सारे निर्माण कार्य करते हैं. दीपावली का त्यौहार आने वाला है, ऐसे में वह इस बार गाय के गोबर से दीपक बना रहे हैं. उन्होंने बताया कि आगरा में आवल खेड़ा में मौजूद गायत्री शक्तिपीठ पर वह भ्रमण करने गए थे. ऐसे में उन्होंने गायत्री शक्तिपीठ द्वारा प्रयोग किए जा रहे गाय के गोबर से बने दीपक देखे. जिसके बाद उन्होंने इसकी प्रक्रिया के बारे में शक्तिपीठ के कर्मचारियों से बात की और जिला जेल में दीपावली से पहले ऐसे दीपकों का निर्माण शुरू करवा दिया.

गायत्री शक्तिपीठ से ही ऑर्डर भी मिल गया

वहीं दूसरी तरफ उन्होंने बताया कि, गायत्री शक्तिपीठ से उन्हें 51000 दीपक बनाने का ऑर्डर मिल गया है. जिसे वह 40 पैसे प्रति दीपक की दर से विक्रय करेंगे. जिसमें वह करीब 25000 दीपक गायत्री शक्तिपीठ को बना कर दे चुके हैं और बाकी के दीपक भी जल्द ही पहुंचा दिए जाएंगे. उनका कहना है कि दीपावली तक करीब 1 लाख दीपों का निर्माण किया जाएगा.

दीपावली तक एक लाख दीपक हो जाएंगे तैयार

जेल सुपरिटेंडेंट के अनुसार, दीपावली तक उन्हें एक लाख दीपक तैयार होने का अंदाजा है. गायत्री शक्तिपीठ में दीपक भेजने के बाद जो दीपक शेष रह जाएंगे उन्हें वह जिला जेल में कैदियों से मिलने आने वाले आगंतुकों को विक्रय करेंगे. साथ ही उन्होंने बताया कि यह दीपक किसी भी तरह से हानिकारक नहीं है. क्योंकि गाय के गोबर से बने होने के चलते लोगों को इसमें आग लगने की संभावना रहती है. लेकिन उन्होंने खुद दीपक जलाकर देखे हैं जिसमें उन्होंने पाया की दीपक जलाने पर ना तो यह तेल को सोकता है और ना ही इसमें आग लगती है.

दीपक बनाने में गाय के गोबर के अलावा किसी भी और सामग्री का प्रयोग नहीं किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जिला जेल में एक गौशाला काफी समय से चल रही है. जिसमें करीब 80 से 85 गायों का पालन पोषण होता है उन्हीं के गोबर से इन दीपकों का निर्माण किया जा रहा है.

रिपोर्ट- राघवेंद्र गहलोत, आगरा

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Author: Sohit Kumar

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