Rourkela News: आम उपभोक्ताओं को खुले बाजार में 15 से 20 रुपये किलो की दर से आलू खरीदना पड़ रहा है, जबकि यही आलू थोक मंडी में महज छह रुपये किलो की दर से बिक रहा है. दरों में इतना होने अंतर के बावजूद शहर का आपूर्ति विभाग इस दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को भी इस कम दर का कोई लाभ मिल सके.
बिचौलिये मालामाल, ग्राहकों की जेब हो रही ढीली
डेली मार्केट के थोक बाजार में आलू कारोबारी छह रुपये की दर से आलू खुदरा विक्रेताओं को बेच रहे हैं. वहीं खुदरा बाजार में आलू दोगुने से भी अधिक दर पर बेचा जा रहा है. ऐसे समय जब महंगाई की मार से हर उपभोक्ता परेशान है, उसे इस घटी हुई कीमतों का कोई लाभ नहीं मिल रहा है. बिचौलियों ने इस घटी दर को मुनाफे में तब्दील कर लिया है.
आवक बढ़ने से कम हुई आलू की दर
डेली मार्केट में आलू-प्याज के थोक कारोबारी दिलीप साहू बताते हैं कि आलू की दरें फिलहाल कम हैं. थोक बाजार में 5 से 6 रुपये किलो यह बिक रहा है. खुदरा कारोबारियों की बात करें, तो इसमें अपने खर्च को जोड़कर कुछ मुनाफे के साथ हमेशा से बेचा जाता रहा है. लेकिन खुदरा में अगर यह 15 से 20 रुपये बिक रहा है, तो फर्क ज्यादा है. दिलीप साहू बताते हैं कि खपत के मुकाबले उत्पादन ज्यादा होने की वजह से आलू के दाम में गिरावट आयी है. आलू का उत्पादन मुख्य रूप से बंगाल और उत्तर प्रदेश में होता है जहां से राउरकेला के बाजार में इसकी आवक होती है. उत्पादन के बाद इसे कोल्ड स्टोरेज में भी रखा जाता है, लेकिन उत्पादन उम्मीद से कहीं ज्यादा होने के कारण यह स्थिति हुई है.
