Rourkela News: फर्जी खाता खोलकर साइबर अपराधियों को बेचते थे और किराये पर देते थे, सात गिरफ्तार
Rourkela News: राउरकेला पुलिस ने फर्जी बैंक एकाउंट खोलकर साइबर अपराधियों को किराये पर देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है.
Rourkela News: पुलिस ने राउरकेला से संचालित एक संगठित आपराधिक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो कुछ बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से काम कर रहा था. गिरोह की मुख्य गतिविधि फर्जी बैंक खाते खोलना और उनका संचालन करना था. ये खाते मुख्य रूप से राउरकेला और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के नाम पर खोले जाते थे, जिनका उद्देश्य भारत और विदेशों में बड़े पैमाने पर साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को अंजाम देना था. सोमवार की शाम राउरकेला पुलिस जिला मुख्यालय में हुई प्रेसवार्ता में एसपी नितेश वाधवानी व अन्य पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी.
जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान का करते थे इस्तेमाल
राउरकेला एसपी ने बताया कि यह गिरोह भोले-भाले लोगों के बैंक खाते खुलवाता था, सिम कार्ड एक्टिवेट करवाता था और पहचान पत्र बनवाता था. वे अक्सर जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते थे. कई खाते मिलीभगत करने वाले बैंक कर्मचारियों की मौन सहमति या लापरवाही से खोले गये थे. इस तरह उन्होंने ग्राहक को जानें (केवाइसी) के मानक नियमों को दरकिनार कर दिया था. फिर इन खातों को भारत भर में साइबर अपराधियों को बेचा या किराये पर दिया जाता था. साइबर अपराध पीड़ितों से धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने के लिए पास-थ्रू खातों के रूप में इनका उपयोग करने, धन के प्रवाह को छिपाने के लिए कई परतें बिछायी जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप धन को अंततः भारत के भीतर और विदेश दोनों जगह स्थानांतरित किया जाता है, यानि मनी लॉन्ड्रिंग.
राउरकेला व आसपास के इलाके में सक्रिय था गिरोह
राउरकेला और उसके आसपास के इलाकों में यह सक्रिय था. वे इन सक्रिय खातों को विभिन्न राज्यों में भेजते थे, जिसकी जांच चल रही है. इन खातों को मात्र 5000-10000 रुपये प्रति खाते की मामूली कीमत पर किराये पर दिया जाता था या बेचा जाता था, जिसे बाद में गिरोह के सदस्यों में वितरित किया जाता था. इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों में किया गया, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग धोखाधड़ी भी शामिल है, जो राउरकेला पुलिस जिले में भी सक्रिय थी. आइ4सी, एमएचए के समन्वय पोर्टल के माध्यम से पता चला है कि ये खाते भारत भर में लगभग 200 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों/मामलों में शामिल हैं. खुफिया जानकारी के आधार पर अतिरिक्त एसपी श्रावणी नायक की देखरेख में एक समन्वित अभियान शुरू किया गया, जिसमें साइबर थाना, रघुनाथपाली, प्लांट साइट, ब्राह्मणी तरंग और सेक्टर-7 पुलिस स्टेशनों की टीमें शामिल थीं.आरोपियों में कुछ बैंक से जुड़े हुए हैं या कर्मचारी है
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में कछ बैंक से जुड़े हुए हैं और/या उनके कर्मचारी हैं. विशेष रूप से सिटी यूनियन बैंक के कर्मचारी, जिन्होंने इन खातों को सक्रिय कराने में इस गिरोह की सक्रिय रूप से मदद की. विभिन्न बैंकों के और भी अंदरूनी लोगों की संलिप्तता का संदेह है, क्योंकि बड़ी संख्या में खाते जाली दस्तावेजों के साथ और पर्याप्त जांच-पड़ताल के बिना खोले गये हैं.गिरफ्तार आरोपी
1. पलाश घोष, पोस्ट ऑफिस गली, पानपोष चौक2. आर्यन महंदिया उर्फ थापा3. वकार खान आनंद भवन लेन4. विक्रम सिंह ,ब्लॉक ए/41, सेक्टर 65. अयान हुसैन, प्लांट साइट मेन रोड6. आकाश शर्मा, बिसरा चौक नियर ट्रैफिक गेट7. बिपिन कुमार शॉ (27), छेंड, राउरकेला
जब्त सामग्री:
विभिन्न बैंकों के 80 पासबुक. 50 डेबिट कार्ड, 10 आधार कार्ड (फर्जी खातों से जुड़े), 20 पैन कार्ड (फर्जी खातों से संबंधित), 15 चेक बुक, चार लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
