झारसुगुड़ा: न्याय की उम्मीद में अदालतों का दरवाजा खटखटाने वाले जिले के लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है. न्यायिक प्रक्रिया में मामलों के निपटारे में लगातार हो रही देरी के कारण लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है. झारसुगुड़ा जिले की विभिन्न अदालतों में विचाराधीन मामलों की संख्या 50 हजार के पार पहुंच गयी है, इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जो पांच से 10 वर्ष या उससे भी अधिक समय से विचाराधीन हैं.
33 प्रतिशत मामले पांच से 10 वर्ष पुराने
हाइकोर्ट से हाल में जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के अंत तक जिले की अदालतों में कुल 50,465 मामले विचाराधीन थे. इनमें 94.8 प्रतिशत आपराधिक मामले हैं. पांच से 10 वर्ष पुराने मामलों की हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत, जबकि 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों की हिस्सेदारी कुल लंबित मामलों में 17 प्रतिशत है. आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक जिले की अदालतों में 50,645 मामले लंबित थे. इनमें 2,677 दीवानी और 47,864 आपराधिक मामले शामिल थे.
6592 नये मामले दर्ज, 6317 का निपटारा भी हुआ
इस वर्ष जुलाई के अंत तक 6,592 नये मामले दर्ज हुए, जिनमें 477 दीवानी और 6,115 आपराधिक मामले हैं. इस अवधि में 6,317 मामलों का निपटारा भी हुआ. 2023 के अंत में जिले की अदालतों में कुल 43,391 मामले लंबित थे. इनमें 3,544 दीवानी और 39,847 आपराधिक मामले थे.
2024 के अंत तक लंबित मामलों की संख्या करीब 43 हजार रही, लेकिन 2025 में यह बढ़कर 50 हजार से अधिक हो गयी. एक वर्ष में लंबित मामलों की संख्या में करीब 7,573 की वृद्धि हुई. वहीं 2023 में 39,847 रहे लंबित आपराधिक मामलों की संख्या 2025 के अंत तक बढ़कर करीब 47,969 हो गयी. यानी दो वर्षों में आपराधिक मामलों में 8,121 यानी 20.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
अदालतों पर बढ़ा दबाव, लोगों को न्याय मिलने में देरी
नये मामलों की तुलना में कम संख्या में पुराना मामलों का निपटारा होना लंबित मामलों के बढ़ते बोझ का प्रमुख कारण माना जा रहा है. इससे अदालतों पर दबाव बढ़ने के साथ आम लोगों को भी समय पर न्याय मिलने में देरी हो रही है.
