Rourkela News: टिशू इंजीनियरिंग का कॉन्सेप्ट मॉडर्न साइंस के सबसे ज्यादा बदलाव लाने वाले क्षेत्र में से एक : प्रो वर्मा

Rourkela News: एनआइटी में टिशू इंजीनियरिंग और मेडिकल डिवाइस पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुरू हुई है. इसमें कई देशों के विद्वान हिस्सा ले रहे हैं.

Rourkela News: टिशू इंजीनियरिंग और मेडिकल डिवाइस के लिए एडवांस्ड बायोमटेरियल पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस (आइसीएबीटीइएमडी-2025) शुक्रवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी राउरकेला में शुरू हुई. इसमें भारत और विदेश के बड़े रिसर्चर, इंजीनियर, डॉक्टर, क्लिनिकल एक्सपर्ट, एंटरप्रेन्योर और युवा साइंटिस्ट एक साथ आये.

ग्राफ्टिंग की चुनौतियों से निपटने में टिशू इंजीनियरिंग की अहमियत के बारे में बताया

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो टीएस संपत कुमार (आइआइटी, मद्रास), सम्मानित अतिथि डॉ लुमिनिता सिमियन (सेंट स्पिरिडॉन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, रोमानिया), प्रो के उमामहेश्वर राव (निदेशक, एनआइटी राउरकेला), प्रो रोहन धीमान (रजिस्ट्रार, एनआइटी राउरकेला) और प्रो देवेंद्र वर्मा (हेड, बीएम विभाग ) मौजूद थे. कॉन्फ्रेंस की चेयरपर्सन प्रो कृष्णा प्रमाणिक ने स्वागत भाषण दिया और ग्राफ्टिंग की चुनौतियों से निपटने में टिशू इंजीनियरिंग की बढ़ती अहमियत पर जोर दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि नये और स्मार्ट बायोमटेरियल और टिशू इंजीनियरिंग का तरीका, खराब टिशू और अंगों को ठीक करने और मेडिकल डिवाइस बनाने के लिए मॉडर्न थेराप्यूटिक इनोवेशन के लिए जरूरी है.

लाइफस्टाइल से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम को ठीक करने में इनोवेशन की अहमियत पर जोर दिया

प्रो देवेंद्र वर्मा ने कहा कि टिशू इंजीनियरिंग का कॉन्सेप्ट, जिसे 1983 में फॉर्मली शुरू किया गया था, अब मॉडर्न साइंस के सबसे ज्यादा बदलाव लाने वाले क्षेत्र में से एक है. उन्होंने बताया कि डिपार्टमेंट ने एक ‘हैंडहेल्ड बायोप्रिंटर’ (एक पोर्टेबल डिवाइस, जो घाव या खराब टिशू पर सीधे जीवित सेल्स और बायोमटेरियल प्रिंट करके ठीक करने में मदद कर सकता है) बनाने के लिए एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया है. प्रो रोहन धीमान ने डिपार्टमेंट की लगातार हो रही रिसर्च की तारीफ भी की और लाइफस्टाइल से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम को ठीक करने में ऐसे इनोवेशन की अहमियत पर जोर दिया. प्रो के उमामहेश्वर राव ने कहा कि वर्टिब्रल कॉलम की बीमारियां सबसे मुश्किल क्लिनिकल प्रॉब्लम में से एक हैं, क्योंकि दुनिया में कहीं भी डिस्क रीजेनरेशन अभी तक नहीं हो पाया है. उन्होंने साइंटिस्ट और युवा रिसर्चर से एडवांस्ड टिशू इंजीनियरिंग समाधान खोजने की अपील की, जो एक दिन स्पाइनल डिस्क रिपेयर और रीजेनरेशन को हकीकत बना सकें. इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र में हुई कामयाबी से पुरानी स्पाइनल कंडीशन से परेशान मरीजों को काफी फायदा होगा. प्रो संपत कुमार ने एडवांस्ड बायोमटेरियल्स की ग्लोबल जरूरत पर जोर दिया, जो टिशू रिपेयर में मदद कर सकते हैं और मेडिकल डिवाइस, खासकर ऑर्थोपेडिक एप्लीकेशन की परफॉर्मेंस को बेहतर बना सकते हैं. कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली शामिल हुईं सम्मानित अतिथि डॉ लुमिनिता सिमियन ने कहा कि टिशू और ऑर्गन फेलियर दुनिया भर में हेल्थ से जुड़ी गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं और उन्होंने कहा कि रीजेनरेटिव मेडिसिन और बायोमटेरियल्स में हो रही तरक्की ज्यादा असरदार और पर्सनलाइज्ड इलाज के तरीकों का रास्ता बना रही है. कॉन्फ्रेंस को प्रो ए थिरुगननम, प्रो अमित बिस्वास (संयोजक), प्रो सुदीप दासगुप्ता और प्रो सुजीत कुमार भूटिया (सह संयोजक) के रूप में संयोजन किया. इस तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले लोग अलग-अलग थीम पर बात करेंगे, जिसमें ऑर्थोपेडिक, डेंटल, कार्डियोवैस्कुलर, न्यूरल और कैंसर एप्लीकेशन के लिए एडवांस्ड बायोमटेरियल, मेडिकल डिवाइस के लिए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीक, साथ ही बायोमटेरियल, इंजीनियर्ड टिशू सब्स्टीट्यूट और मेडिकल डिवाइस के रेगुलेटरी, एथिकल और आइपीआर से जुड़े पहलू शामिल हैं.

यूएसए, यूके, जापान, रोमानिया, सिंगापुर, मलेशिया और भारत के वक्ता ले रहे हिस्सा

एनआइटी राउरकेला में बायोटेक्नोलॉजी और मेडिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में शिक्षा मंत्रालय द्वारा बनाये गए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन टिशू इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित यह कॉन्फ्रेंस 30 नवंबर तक हाइब्रिड मोड पर चलेगी. यह टिशू इंजीनियरिंग और मेडिकल डिवाइस टेक्नोलॉजी के लिए इनोवेटिव और एडवांस्ड बायोमटेरियल पर मल्टीडिसिप्लिनरी बातचीत के लिए एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म देगी. लगभग 125 रजिस्टर्ड डेलीगेट्स के साथ, इस इवेंट में प्लेनरी लेक्चर, कीनोट और इनवाइटेड लेक्चर, टेक्निकल सेशन, टेक्निकल एग्जिबिशन, पोस्टर सेशन शामिल हैं. जिसमें एडवांस्ड बायोमटेरियल्स, नैनोमटेरियल्स, ऑर्थोपेडिक, डेंटल, ऑप्थैल्मिक, कार्डियक, बीमारियों और डिसऑर्डर आदि के लिए टिशू-रीजेनरेशन स्ट्रेटेजी, इनोवेटिव मटेरियल्स और बायोमेडिकल डिवाइस की मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसलेशनल अप्रोच और बायोमटेरियल डिजाइन में एआइ/एमएल एप्लीकेशन और अन्य शामिल हैं. यूएसए, यूके, जापान, रोमानिया, सिंगापुर, मलेशिया और भारत के जाने-माने वक्ता इस कॉन्फ्रेंस में नॉलेज एक्सचेंज, नेटवर्किंग और रिसर्च कोलेबोरेशन के लिए हिस्सा ले रहे हैं.

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