Rourkela News: एनआइटी राउरकेला और ओएमसी ने माइनिंग में कौशल विकास को किया एमओयू

Rourkela News: एनआइटी राउरकेला और ओएमसी ने माइनिंग क्षेत्र में उन्नत तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एमओयू किया है.

Rourkela News: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) राउरकेला और ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएमसी) ने माइनिंग क्षेत्र में उन्नत तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये हैं. ओएमसी, जो ओडिशा सरकार का उपक्रम है, के पेशेवरों के लिए क्षमता निर्माण, तकनीकी विस्तार और प्रबंधकीय कौशल मजबूत करने का यह कदम संयुक्त अनुसंधान, नवाचार, डिजिटलीकरण तथा संचालन अनुकूलन पर केंद्रित है.

तीन दिवसीय सीपीडी कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

एमओयू हस्ताक्षर के साथ ही एनआइटी राउरकेला में ‘मिनरल रिसोर्स मैनेजमेंट: टेक्निकल, रेगुलेटरी एंड स्ट्रेटेजिक इनसाइट्स’ विषयक तीन दिवसीय निरंतर व्यावसायिक विकास (सीपीडी) कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. अर्थ एवं वायुमंडलीय विज्ञान तथा खनन इंजीनियरिंग विभागों ने संयुक्त रूप से ओएमसी अधिकारियों के लिए यह गहन प्रशिक्षण आयोजित किया, जो खनिज संसाधन प्रबंधन के तकनीकी, नियामकीय एवं रणनीतिक पक्षों को एकीकृत करता है. कोर्स समन्वयक प्रो एसकेएमडी एक्वीनुद्दीन (अर्थ एवं वायुमंडलीय विज्ञान विभाग) तथा प्रो एचबी साहू (एलुमनाई, उद्योग एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध डीन) हैं. हस्ताक्षर समारोह में एनआइटी की ओर से प्रो के उमामहेश्वर राव (निदेशक) तथा ओएमसी की ओर से आलोक कुमार पाल (एचआर निदेशक) ने एमओयू पर दस्तखत किये. प्रो हिमांशु भूषण साहू ने समन्वय किया.

ओएमसी पेशेवरों की विशेषज्ञता मजबूत करेगी

प्रो एचबी साहू ने कहा कि यह साझेदारी माइनिंग की बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए ओएमसी पेशेवरों की विशेषज्ञता मजबूत करेगी. हम अनुसंधान, सतत प्रक्रियाएं, पर्यावरण प्रबंधन, नियामक अनुपालन तथा डिजिटल उपकरणों पर ध्यान देंगे. आलोक कुमार पाल ने बताया कि ओएमसी लौह अयस्क, बॉक्साइट, क्रोम आदि आवश्यक खनिजों का उत्पादन करता है. हम यंत्रीकृत एवं प्रौद्योगिकी संचालित खनन की ओर अग्रसर हैं. यह साझेदारी उच्च प्रदर्शन वाली कार्यबल तैयार करेगी तथा ओडिशा के औद्योगिक विकास में योगदान देगी. प्रो उमामहेश्वर राव ने जोर दिया कि ओडिशा में लौह अयस्क से दुर्लभ मिट्टी तक सभी खनिज उपलब्ध हैं. सतत एवं मूल्यवर्धित उपयोग से क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करेंगे. एमओयू के तहत एआइ, जियोस्टैटिस्टिक्स, खनन स्वचालन जैसी तकनीकें अपनायी जायेंगी.

एमओयू में यह बिंदु हैं शामिल

लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम, स्ट्रेटेजिक थिंकिंग पर वर्कशॉप, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, फाइनेंशियल और ऑपरेशनल एफिशिएंसी, और कस्टमाइज़्ड मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमडीपीएस) शामिल हैं. इसमें जॉइंट सर्टिफिकेशन कोर्स, शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग मॉड्यूल, फैकल्टी के सेशन, फील्ड-बेस्ड लर्निंग और लैबोरेटरी इंटरैक्शन शामिल हैं ताकि लगातार सीखने का इकोसिस्टम बनाया जा सके.

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By BIPIN KUMAR YADAV

BIPIN KUMAR YADAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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