झारसुगुड़ा: झारसुगुड़ा से बेलपहाड़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग-49 का करीब 20 किलोमीटर हिस्सा कोयले की उड़ती धूल और राख के कारण खतरनाक बन गया है. इस सड़क पर दिन में भी कोहरे जैसा भ्रम पैदा हो रहा है. कोयले की धूल से राष्ट्रीय राजमार्ग पर दृश्यता कम हो गयी है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है.
यह इलाका खदानों, कोयला परिवहन और औद्योगिक इकाइयों से घिरा है. भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान सड़क पर भारी मात्रा में धूल उड़ती है. कोयला और औद्योगिक कचरा ढोने वाले वाहनों से सड़क पर गिरने वाला कोयला व कचरा सूखने के बाद वाहनों के गुजरने पर हवा में उड़ने लगता है. खासकर सूखे मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे स्थित दुकानों और घरों में धूल जमने से काफी परेशानी हो रही है.
झारसुगुड़ा-बेलपहाड़ औद्योगिक कॉरिडोर में कोयले और औद्योगिक कचरे से होने वाले प्रदूषण को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं. राजमार्ग के दोनों किनारों पर कोयले की धूल और कचरे के ढेर भी देखे जा रहे हैं.
लोगों ने सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव, कोयला व कचरा ढोने वाले वाहनों को पूरी तरह ढककर परिवहन करने, सड़क पर जमा धूल-कचरे की सफाई तथा परिवहन नियमों की सख्ती से जांच की मांग की है. पर्यावरणविदों का कहना है कि ईब वैली क्षेत्र पहले से ही प्रदूषण की दृष्टि से संवेदनशील है. ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित नहीं की गयी और ओवरलोडिंग पर रोक नहीं लगायी गयी, तो समस्या और गंभीर हो सकती है.
