असली शिवसेना पर अब चुनाव आयोग करेगा फैसला, SC से उद्धव ठाकरे को झटका, एकनाथ शिंदे गुट की जीत

सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे की अर्जी को खारिज कर दिया है और चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर फैसला लेने की मंजूरी दे दी है.

असली शिवसेना मुद्दे पर एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde ) गुट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत मिली है. जबकि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray ) गुट को करारा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे की अर्जी को खारिज कर दिया है और चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर फैसला लेने की मंजूरी दे दी है.

उद्धव ठाकरे को करारा झटका

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने विश्वास जताया था कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी खेमे के साथ कानूनी लड़ाई में उन्हें करारी हार मिली है.

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पांच सदस्यीय संविधान पीठ कर रही थी शिंदे और ठाकरे गुट की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 23 अगस्त को शिवसेना और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से दाखिल याचिकाओं को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया था. जिनमें दलबदल, विलय और अयोग्यता से जुड़े कई संवैधानिक सवाल उठाए गए थे.

क्या है मामला

दरअसल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी गुट को असली शिवसेना बताया था. जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी कि निर्वाचन आयोग को असली शिवसेना मामले में शिंदे गुट के दावे पर निर्णय लेने से रोका जाए.

शिंदे ने किया था उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह, महाराष्ट्र में गिर गयी महा विकास आघाड़ी सरकार

मालूम हो इसी साल जून में शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ एकनाथ शिंदे और 39 अन्य विधायकों ने विद्रोह कर दिया, जिसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी सरकार गिर गई थी. शिंदे ने अपने समर्थक विधायकों के साथ बहुत दिन तक गुजरात और गुवाहाटी में समय गुजारा, फिर महाराष्ट्र लौटकर भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर नयी सरकार बनायी. जिसमें देवेंद्र फडणवीस ने 30 जून को उप मुख्यमंत्री और शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

शिंदे और ठाकरे ने दी थी ऐसी दलिल

उद्धव ठाकरे ने कहा था कि एकनाथ शिंदे गुट के विधायक किसी दूसरी पार्टी के साथ विलय करके की खुद को संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से बचा सकते हैं. जबकि शिंदे गुट ने कहा था कि दलबदल रोधी कानून उन नेताओं के लिए कोई आधार नहीं है, जिसने पहले ही पार्टी का विश्वास खो दिया.

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

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अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

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खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

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