नोवामुंडी में कपड़ाफाड़ होली की धूम, बाजार चौक रंगों से सराबोर

Noamundi Holi Celebration: नोवामुंडी में होली पर बाजार चौक और पूरे शहर में रंगों की धूम रही. कपड़ा फाड़ होली, बच्चों और युवाओं की उमंग, प्रशासन और पुलिस की सतर्कता ने उत्सव को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाया. लोग भाईचारे, परंपरा और हर्षोल्लास के साथ त्योहार का आनंद लेने में जुटे रहे. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट

Noamundi Holi Celebration: रंगों के पावन पर्व होली पर बुधवार को झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले का नोवामुंडी पूरी तरह रंगमय नजर आया. सुबह की पहली किरण के साथ ही बच्चे, युवा, पुरुष और महिलाएं सड़कों पर उतर आए. पूरे शहर में उत्साह, उमंग और भाईचारे का अनोखा संगम देखने को मिला. गली-गली और चौक-चौराहों पर “होली है!” की गूंज सुनाई देती रही.

बच्चों और युवाओं में दिखा खास उत्साह

होली का सबसे ज्यादा उत्साह छोटे-छोटे बच्चों और युवाओं में देखने को मिला. बच्चों ने टोली बनाकर एक-दूसरे को गुलाल लगाया और रंगों से सराबोर हो गए. युवाओं की टोलियां डीजे की धुन पर झूमती नजर आईं. रंग, अबीर और गुलाल के साथ पूरे शहर का माहौल उत्सवमय बना रहा. कई स्थानों पर लोगों ने पारंपरिक गीतों के साथ होली खेली, तो कहीं आधुनिक संगीत की धुन पर लोग थिरकते दिखे. हर मोहल्ले में आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश देखने को मिला.

बाजार चौक में कपड़ाफाड़ होली की परंपरा

नोवामुंडी बाजार चौक में पारंपरिक कपड़ाफाड़ होली ने सबका ध्यान खींचा. युवाओं की टोली एक-दूसरे को रंग लगाते हुए मस्ती में झूमती रही. डीजे की तेज धुन और रंगों की बारिश के बीच कपड़ाफाड़ होली का अलग ही उत्साह दिखा. इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आसपास के लोग भी जुटे रहे. हालांकि पूरे आयोजन के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखा गया. किसी तरह की अव्यवस्था या झड़प की सूचना नहीं मिली.

हर मोहल्ले में रंगों का जादू

नोवामुंडी बंगाली पाड़ा कॉलोनी, संग्राम साईं, मनसा मंदिर टोला, कुम्हार टोली, बालीझरण, सेंटर कैंप, डीवीसी कॉलोनी, डुका साईं, आजाद बस्ती और थाना कैंपस सहित पूरे क्षेत्र में होली की जबरदस्त धूम रही. लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं. कई स्थानों पर साबुन होली भी खेली गई, जिसमें रंगों के बाद साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया. घर-घर में मिठाइयों और पकवानों का दौर चलता रहा, जिससे त्योहार की रौनक और बढ़ गई.

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भागीदारी

थाना कैंपस में बाजार समिति के अध्यक्ष पप्पू गुप्ता अपनी टीम के साथ पहुंचे और लोगों को रंग-गुलाल लगाकर बधाई दी. वहीं टाटा स्टील के हेड एडमिनिस्ट्रेशन विभाग से निशिकांत सिंह भी मौजूद रहे. उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ होली की खुशियां साझा कीं और सौहार्द का संदेश दिया. जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति से लोगों में उत्साह और बढ़ गया. सभी ने मिलकर शांति और भाईचारे के साथ त्योहार मनाने का संकल्प लिया.

प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद

होली को लेकर प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखा. सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे शहर में शांतिपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ पर्व मनाया गया. नोवामुंडी बीडीओ पप्पू रजक भी चौक-चौराहों पर निरीक्षण करते नजर आए, जिससे लोगों में सुरक्षा का भरोसा बना रहा. नोवामुंडी बाजार चौक और डीवीसी चौक पर सुरक्षा बल के जवान अलर्ट रहे. खास बात यह रही कि नशे में धुत कोई भी बाइक चालक सड़कों पर नजर नहीं आया, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना लगभग शून्य रही.

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भाईचारे और परंपरा का संदेश

इस बार की होली ने नोवामुंडी में परंपरा, उत्साह और भाईचारे का ऐसा रंग बिखेरा, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे. रंगों के इस त्योहार ने सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द को और मजबूत किया. पुलिस प्रशासन की सतर्कता और स्थानीय लोगों के सहयोग से कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली. शांतिपूर्ण और उल्लासपूर्ण वातावरण में होली का पर्व संपन्न हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को रंगों की खुशियों से सराबोर कर दिया.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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