हर साल 73 लाख महसूल देने वाला मंगलाहाट बदहाल, कीचड़ व गंदगी का अंबार

चाईबासा का मंगलाहाट हर साल 73 लाख का राजस्व देता है, लेकिन नगर परिषद की लापरवाही से यहां गंदगी और कीचड़ का अंबार है। व्यापारी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं।

चाईबासा: हर साल 73 लाख रुपये महसूल देने वाला चाईबासा का मंगला हाट इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जिले के विभिन्न प्रखंडों से हजारों लोग हर सप्ताह यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं, पर बाजार परिसर में फैली गंदगी, जाम नालियां और कीचड़ लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गयी है. नगर परिषद की लापरवाही के कारण ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. इससे हल्की बारिश में भी बाजार में जलजमाव की स्थिति बन जाती है.

व्यापार पर पड़ रहा सीधा असर

बाजार परिसर में स्थिति इतनी विकट है कि जगह-जगह कूड़े का अंबार लगा है. नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से गंदा पानी सड़कों और दुकानों के सामने बहते रहता है. कीचड़ और दुर्गंध के कारण ग्राहकों का बाजार में चलना-फिरना दूभर हो गया है, जिसका सीधा असर यहां के व्यापार पर पड़ रहा है. व्यापारियों का कहना है कि गंदगी और बदबू के कारण कई ग्राहक खरीदारी किए बिना ही लौट जाते हैं.

कर वसूली में आगे है नगर परिषद

स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि मंगला हाट जिले का सबसे बड़ा साप्ताहिक बाजार है. यहां ग्रामीण क्षेत्रों के किसान, छोटे व्यापारी और वनोत्पाद के विक्रेता अपनी सामग्री बेचने आते हैं. इसके बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. बाजार में न तो शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है और न ही दुकानदारों के बैठने के लिए पर्याप्त शेड या प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं. धूप और बारिश दोनों मौसम में उन्हें खुले आसमान के नीचे बैठकर कारोबार करना पड़ता है. व्यापारियों का आरोप है कि वे नियमित रूप से नगर परिषद को टैक्स और शुल्क का भुगतान करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें आवश्यक सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं.

साफ-सफाई और ड्रेनेज दुरुस्त करने की मांग

व्यापारियों ने नगर परिषद से मांग की है कि मंगला हाट की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाये. जाम नालियों को तत्काल साफ कर ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त किया जाये तथा कूड़े के नियमित उठाव का प्रबंध हो. साथ ही पेयजल, शौचालय, बैठने के लिए शेड और बेहतर प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं भी जल्द से जल्द उपलब्ध करायी जाये.

क्या कहते हैं हाट के दुकानदार

मंगला हाट की ना तो नियमित साफ- सफाई होती है और ना ही नालियों की सफाई की जाती है. इससे नालियां जाम हो गयी हैं, जिसका गंदा पानी ओवरफ्लो होकर बाजार में फैल जाता है.

साेमेश ठाकुर

मैं मंगलाहाट में रोजाना साबुन- सर्फ आदि की दुकान लगाता हूं. बारिश होने पर मंगलाहाट कीचडों से सन जाता है. ऐसे में ना केवल ग्राहकों को, बल्कि दुकानदारों को भी परेशानी होती है.

कल्लू सिन्हा

मैं वर्षों से मंगलाहाट में सब्जी की दुकान लगाता हूं. यहां ना तो नियमित साफ- सफाई होती है, जबकि हाट का ठेकेदार मंगलाहाट से हर साल 73 लाख रुपयों की वसूली करता है. -

राजकुमार साव

मैं मंगलाहाट में लहसून, मिर्चा आदि की दुकान लगाता हूं. हाट की नियमित साफ- सफाई नहीं होती है. नाली तो बनी है, लेकिन आज तक एक बार भी साफ- सफाई नहीं की करायी गयी है.

- प्रमोद सोनकर


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लेखक के बारे में

Author: Sunil kr sinha

Published by: Sameer Oraon

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