सारंडा सैंक्चुअरी बनेगा या नहीं, ग्रामीणों की राय जानने पहुंचा झारखंड के मंत्रियों का समूह

GoM in Saranda Meets Villagers on Sanctuary: एशिया में साल के पेड़ के सबसे घने जंगल सारंडा को वन्यजीव अभ्यारण्य (सैंक्चुअरी) बनाया जायेगा या नहीं, इसके बारे में रायशुमारी करने के लिए झारखंड के मंत्रियों का एक समूह मंगलवार को सारंडा पहुंचा. वहां के निवासियों की बातें सुनीं और अपनी बातें भी उनको बतायी. मंत्रियों ने आदिवासी समाज के लोगों से क्या कहा, यहां पढ़ें.

GoM in Saranda: सारंडा के छोटानागरा मचानगुटू मैदान में सोमवार को झारखंड सरकार की विधानसभा स्तरीय समिति की मौजूदगी में एक बड़ी आमसभा हुई. इसका उद्देश्य सारंडा को वन्य अभ्यारण (सैंक्चुअरी) घोषित करने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों की राय लेना था. सभा में हजारों ग्रामीण, पंचायत प्रतिनिधि, मुंडा-मानकी, जनप्रतिनिधि व सामाजिक संगठन के लोग शामिल हुए. कार्यक्रम स्थल पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और परिवहन की विशेष व्यवस्था की गयी थी.

ग्रामीणों ने वन्यजीव अभ्यारण्य बनाने का किया विरोध

सारंडा के डीएफओ अभिरूप सिन्हा के संबोधन के बाद समिति ने ग्रामीणों से सीधे संवाद की शुरुआत की. उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की राय ही अंतिम रिपोर्ट का आधार बनेगी. ग्रामीणों ने जमीन, परंपरागत अधिकार, पूजा स्थल और वनोपज संरक्षण की मांग उठायी. खदानों के बंद होने और रोजगार न मिलने पर नाराजगी जतायी. विस्थापन की आशंका और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठे.

चिड़िया खदान अस्पताल की बदहाली और पोंगा नदी पर पुल रहा प्रमुख मुद्दा

चिड़िया खदान अस्पताल की बदहाली और पोंगा नदी पर पुल नहीं बनने का मुद्दा प्रमुख रहा. विभिन्न गांवों के प्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना सैंक्चुअरी (वन्यजीव अभ्यारण्य) का कोई औचित्य नहीं है. कुछ ने सैंक्चुअरी को विकास का अवसर बताया, तो कुछ ने इसे आदिवासी अधिकारों पर खतरा करार दिया.

हेलीकॉप्टर में राधाकृष्ण किशोर, चमरा लिंडा और दीपिका पांडेय सिंह. फोटो : प्रभात खबर

जनता की भावनाओं के विपरीत कोई निर्णय नहीं लेगी सरकार – राधा कृष्ण किशोर

सैंक्चुअरी के पक्ष में तर्क दिया गया कि इससे वन्यजीवों का संरक्षण होगा. ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा. वहीं, इसका विरोध करने वालों ने कहा कि खेती, चराई, वनोपज और रोजगार पर असर पड़ेगा. विस्थापन की स्थिति बनेगी. समिति के अध्यक्ष झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करती है और जनता की भावनाओं के विपरीत कोई निर्णय नहीं लेगी.

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GoM in Saranda: सुप्रीम कोर्ट ने सारंडा को दिया है वन्य जीव अभ्यारण्य बनाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एशिया के सबसे घने साल के जंगल सारंडा को वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी घोषित करने के प्रस्ताव पर झारखंड सरकार ने काम शुरू कर दिया है. इसी के तहत कैबिनेट ने इस पर अंतिम फैसला लेने से पहले एक मंत्रिसमूह का गठन किया और उससे रिपोर्ट देने को कहा. मंत्रियों का समूह मंगलवार को ग्रामीणों के साथ बातचीत करने के लिए सारंडा के दौरे पर पहुंचा. ग्रामीणों से संवाद किया. समूह में राधाकृष्ण किशोर के अलावा चमरा लिंडा और दीपिका पांडेय सिंह भी शामिल थीं.

एशिया का सबसे घने जंगलों में एक सारंडा.

एशिया के प्रसिद्ध साल के जंगल की हैं ये विशेषताएं, होंगे ये फायदे

एशिया का प्रसिद्ध साल वृक्ष का जंगल होने के कारण सारंडा केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की धरोहर है. सरकार का मानना है कि यहां की हरियाली, जैव-विविधता और प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखना सबकी जिम्मेदारी है. इस क्षेत्र में एक ओर समृद्ध जंगल है, जहां वन्यजीव और प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहेंगे, तो दूसरी ओर यहां के लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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