प्रतिनिधि, चक्रधरपुर
चक्रधरपुर नगर परिषद क्षेत्र की सफाई व्यवस्था एक बार फिर पूरी तरह चरमरा गई है. शहर के अधिकांश इलाकों में कचरे का अंबार लगा है और चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है. स्थानीय निवासियों को भीषण बदबू और बीमारियों के खतरे के बीच जीने को मजबूर होना पड़ रहा है. हैरानी की बात यह है कि सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए वर्ष 2020 में अचीवर कंपनी को पूरे 20 वर्षों का दीर्घकालिक अनुबंध किया गया था, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर हालात सुधरने के बजाय और बदतर हो गए हैं.
सफाई व्यवस्था लाचार
सफाई कार्यों के लिए चक्रधरपुर नगर परिषद के पास कुल 33 वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन रखरखाव के अभाव में इनमें से केवल 6 वाहन ही सड़क पर दौड़ रहे हैं. शेष 27 वाहन लंबे समय से जंग खा रहे हैं और डिपो में खराब पड़े हैं. पर्याप्त वाहनों के न होने से अधिकांश वार्डों तक कचरा उठाने वाली गाड़ियां पहुंच ही नहीं पा रही हैं.
एजेंसी बनाम प्रशासन: 22 माह का भुगतान फंसा
सफाई व्यवस्था के इस कदर ठप होने के पीछे एजेंसी और प्रशासन की आपसी खींचतान भी मुख्य वजह बनी हुई है.
एजेंसी का पक्ष: संबंधित एजेंसी का दावा है कि नगर परिषद पर उसका 22 महीनों का भुगतान बकाया है. फंड की कमी के कारण वाहनों की मरम्मत और दैनिक संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
प्रशासन का पक्ष: कार्यपालक पदाधिकारी विजय कुमार हांसदा का कहना है कि स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है. जल्द ही एजेंसी के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की जाएगी. कार्यपालक पदाधिकारी ने आश्वासन देते हुए कहा कि जल्द ही बैठक आयोजित कर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने, खराब वाहनों की मरम्मत, लंबित बकाए का भुगतान करने और 20 साल के अनुबंध की समीक्षा जैसे तमाम मुद्दों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा.
जनता का उठता सब्र
20 साल का अनुबंध होने के बावजूद बुनियादी सफाई न मिलना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है. अब देखना यह होगा कि नगर परिषद की आगामी बैठक से कोई ठोस समाधान निकलता है या चक्रधरपुर के नागरिक इसी तरह गंदगी और बदबू के साए में जीने को मजबूर रहेंगे.
