उजड़ा आशियाना. रोरो नदी के किनारे से अतिक्रमण हटाने के बाद 2000 की आबादी परेशान
कड़ाके की ठंड में अलाव के सहारे कट रही रात
तीन फीट के तिरपाल में रह रहे 10-10 सदस्य
शौचालय नहीं होने से महिलाओं को हो रही समस्या
चाईबासा : चाईबासा का तापमान दो दिनों से लगातार नीचे जा रहा है. सूरज भी बादलों में छिप गया है. सर्द हवा चल रही है. इस कड़ाके के ठंड में रोरो नदी के किनारे से हटाये गये अतिक्रमण के कारण करीब 2000 हजार लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश हैं. बच्चे, महिलाएं व बुजुर्ग अलाव के सहारे ठिठुरते हुए किसी तरह रात बीता रहे हैं. इनमें दो दिन के बच्चे से लेकर 90 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं. लोग जैसे-तैसे तिरपाल व चादर तानकर रात काट रहे हैं. अतिक्रमण हटाने के कारण तिरपाल लगाने की जगह भी नहीं है. वहीं समतल स्थान भी नहीं है, जहां कुछ बिछाकर बैठा या सोया जा सके.
अतिक्रमण की मार ऐसी है कि बहुओं को उनके मायके भेजा जा रहा है. वहीं मायके आयी बेटियों को ससुराल पहुंचाया जा रहा है. हर तरफ मातम और घर टूटने का दुख है. स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे, मलबे की सफाई में जुटे. घर टूटने से बच्चों की पढ़ाई ठप पड़ गयी है. बच्चे स्कूल और कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं. अपने परिजनों के साथ बच्चे भी मलबा हटाने में जुटे हैं. लोग अपने टूटे हुए घरों के मलबे पास डटे हुए हैं. कई ने किराये पर ले रखा है टेंट. सिर से छत छीन जाने के कारण कई लोग किराये पर तंबू लेकर आये हैं. तंबू लगाकर रह रहे हैं. कई रिक्शा चालक तंबू में रह रहे हैं. उनके सामने समस्या है कि वे कितने दिन तक व कहां से टेंट का किराया दे पायेंगे. प्रशासन के रवैये से ग्रामीणों में रोष.
दो दिन तक बुलडोजर चलाकर घर तोड़ने के बाद से प्रशासन ने खोज खबर तक नहीं ली है. इसे लेकर लोगों में काफी रोष है. प्रभावितों का सवाल है कि प्रशासन की जिम्मेवारी भूले-भटके लोगों की मदद करने की है. एक तरफ प्रशासन सड़क पर सो रहे लोगों को कंबल व छत (रैन बसेरा) दे रहा है, वहीं इस कड़ाके की ठंड में हमारा आशियाना उजाड़ दिया गया. शौचालय टूटने से बढ़ी महिलाओं की समस्या. अतिक्रमण हटाने के दौरान प्रशासन ने इलाके के शौचालय तोड़ दिया. शौचालय टूटने से सबसे अधिक समस्या महिलाओं को हो रही है. महिलाओं को स्नान करने और कपड़े बदलने में परेशानी होती है. किराये पर नहीं मिल रहा घर, गरीबों की परेशानी बढ़ी. अचानक घर टूटने से समस्या उत्पन्न हो गयी है. प्रभावित किराये पर घर तलाश रहे हैं, लेकिन घर नहीं मिल रहा है. प्रभावितों में कई ऐसे लोग हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे किराये पर घर ले सकें.
नहीं जल रहे चूल्हे, बच्चों के दूध गर्म करने में भी आफत
यहां किसी के घर में चूल्हा तक नहीं जल रहा है. बच्चों के लिए दूध गर्म करने की समस्या उत्पन्न हो गयी है. लोग किसी तरह तीन फीट के तिरपाल में रहने को विवश हैं. तिरपाल भी इस तरह से टंगे हैं कि सिर सीधा तिरपाल से टकराता है. तिरपाल में कूट या प्लास्टिक बिछाकर लोग रह रहे हैं. कहीं-कहीं ईंट का चूल्हा बनाकर बच्चों के लिए दूध गर्म किया जा रहा है.
नहीं जल रहे चूल्हे, बच्चों के दूध गर्म करने में भी आफत
यहां किसी के घर में चूल्हा तक नहीं जल रहा है. बच्चों के लिए दूध गर्म करने की समस्या उत्पन्न हो गयी है. लोग किसी तरह तीन फीट के तिरपाल में रहने को विवश हैं. तिरपाल भी इस तरह से टंगे हैं कि सिर सीधा तिरपाल से टकराता है. तिरपाल में कूट या प्लास्टिक बिछाकर लोग रह रहे हैं. कहीं-कहीं ईंट का चूल्हा बनाकर बच्चों के लिए दूध गर्म किया जा रहा है.
प्रशासन पर दर्ज हो 304 का मुकदमा, विधानसभा में उठेगा मामला : दीपक बिरुवा
विधायक दीपक बिरुवा ने सोमवार को प्रभावित इलाके का दौरा किया. उन्होंने कहा वे कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन मानवीय संवेदना भी कोई चीज है. अगर अतिक्रमण हटाना है, तो फरवरी के बाद विचार किया जा सकता था. अतिक्रमण के कारण ठंड से बच्चे की मौत हो गयी. प्रशासन पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए. विधायक ने कहा वे यह मामला विधानसभा में उठायेंगे. याचिका समिति में मामला जायेगा. यह देखा जायेगा कि कोर्ट के कितने आदेशों का प्रशासन ने अनुपालन कराया है. मुझे यह कार्रवाई पक्षपातपूर्ण लग रही है.
राहत शिविर से मिले दो वक्त के भोजन पर कट रही जिंदगी
आसपास के युवकों ने मिल-जुलकर प्रभावितों के लिए एक राहत शिविर बनाया है. इस राहत शिविर से दो वक्त की दाल-भात व सब्जी प्रभावितों को दी जा रही है. फिलहाल प्रभावितों के लिए राहत शिविर ही लाइफ लाइन की तरह काम कर रही है. यहां के युवकों ने तिरपाल और कंबल का बंदोबस्त किया है.
विधायक के खिलाफ भी नाराजगी
विधायक दीपक बिरुवा को लेकर लोगों में नाराजगी दिखी. लोगों का कहना था कि जब घर तोड़े जा रहे थे, तब उनको आना चाहिए था. घर टूटने के बाद आने का क्या मतलब है.
काफी परेशानी हो रही है. कुछ नहीं बचा है. सब कुछ खत्म हो गया है. क्या करेंगे, कहां जायेंगे कुछ समझ में नहीं आ रहा है. शौचालय तक की समस्या है.
सितारो बानो
घर का सारा सामान घर के अंदर ही दब गया. राहत शिविर से मिले भोजन से जीवन चल रहा है.
रजिया बेगम
टायर व लकड़ी जलाकर रात काट रहे हैं. जैसे-तैसे जीवन काटने को मजबूर हो गये हैं.
शेख इनाम
खुले में सोना पड़ रहा है. यहां कंबल और तिरपाल की सख्त जरूरत है.
मो़ रफी
बहू को उसके मायके पहुंचा दिया है. घर आयी बेटी को ससुराल भेजना पड़ा. काफी समस्या हो रही है. अब चिंता यह है कि घर कहां और कैसे होगा.
शहनाज परवीन
कंबल और तिरपाल के बिना खुले में रात गुजारनी पड़ रही है. समस्या हो रही है.
मुसतरी बेगम
डेढ माह का बच्चा है. खुले में सोने में परेशानी हो रही, किराये पर घर नहीं मिल रहा.
मो़ भोलू
