नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट
West Singhbhum News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी में मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है. जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) चाईबासा की पहल से एक असहाय और अज्ञात बुजुर्ग व्यक्ति को सुरक्षित रूप से ओल्ड एज होम पहुंचाया गया. यह कदम समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है.
दयनीय हालत में मिला बुजुर्ग, तत्काल हुई पहल
जानकारी के अनुसार, उक्त बुजुर्ग बेहद खराब स्थिति में नोवामुंडी क्षेत्र में पाए गए थे. वे शारीरिक रूप से कमजोर और असहाय नजर आ रहे थे. प्रारंभिक पूछताछ में उन्होंने अपना नाम मदन साहू बताया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. उनकी हालत को देखते हुए मामले को गंभीरता से लिया गया और तुरंत राहत पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई.
डालसा की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष मौहम्मद शाकिर के मार्गदर्शन और सचिव रवि चौधरी के नेतृत्व में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया. डालसा की टीम ने मामले में तेजी दिखाते हुए संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई. इस त्वरित कार्रवाई के कारण ही बुजुर्ग को समय पर सुरक्षित स्थान मिल सका.
सामूहिक प्रयास से मिला सुरक्षित ठिकाना
इस मानवीय पहल में कई संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा. टाटा स्टील फाउंडेशन, नोवामुंडी पुलिस और अंचल कार्यालय ने मिलकर बुजुर्ग को सुरक्षित रूप से ओल्ड एज होम पहुंचाने में सहयोग किया. वहां उनके रहने, खाने और चिकित्सा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे उन्हें सम्मानजनक जीवन मिल सके.
मीडिया की भूमिका भी रही अहम
इस पूरे मामले में स्थानीय मीडिया की भूमिका भी सराहनीय रही. प्रभात खबर के प्रतिनिधि द्वारा सूचना प्रसारित किए जाने के बाद ही प्रशासन तक मामला तेजी से पहुंचा. इससे यह स्पष्ट होता है कि मीडिया और प्रशासन के समन्वय से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है.
पारा लीगल वालंटियर्स का योगदान
इस कार्य में पारा लीगल वालंटियर्स ने भी सक्रिय भूमिका निभाई. उमर सादिक, प्रमिला पात्रो, विनिता सांडिल, रेनु देवी, सोमा बोस और पूनम देवी ने पूरी प्रक्रिया में सहयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि बुजुर्ग को हर संभव मदद मिल सके.
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समाज के लिए एक प्रेरक संदेश
नोवामुंडी की यह घटना सिर्फ एक राहत कार्य नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा है. यह दिखाता है कि यदि प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं और आम लोग मिलकर काम करें, तो किसी भी जरूरतमंद को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. यह पहल डालसा चाईबासा की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता को दर्शाती है. साथ ही यह संदेश देती है कि हर व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन का अधिकार है और समाज का दायित्व है कि वह ऐसे लोगों की मदद के लिए आगे आए.
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