रांची/चाईबासा : सिंहभूम के सांसद लक्ष्मण गिलुवा ने कहा कि खरसावां शहीद स्थल पर सीएनटी-एसपीटी एक्ट के मुद्दे पर नारेबाजी करना विपक्ष की घिनौनी राजनीति है. इस मुद्दे पर विरोध जताने के अन्य स्थल हो सकते थे. शहीद स्थल पर ऐसी हरकत कर विपक्ष ने शहीदों की कुरबानी को शर्मसार किया है. सांसद सरायकेला-खरसावां शहीद स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विपक्ष के हंगामे को लेकर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि शहीदों को नमन व श्रद्धासुमन अर्पण करना हर किसी का हक है. उनकी श्रद्धांजलि सभा में सीएम व सरकार का विरोध करना किसी तरह से सही नहीं था. ऐसे घिनौने कार्य कर विपक्ष आदिवासी-मूलवासियों को बरगला रहा है.
विपक्ष के विरोध के पीछे अदृश्य शक्ति : विपक्ष किसी अदृश्य शक्ति के वश में आकर आदिवासी, मूलवासी व रैयतों के हित के लिए सरलीकरण किये गये सीएनटी-एसपीटी एक्ट के खिलाफ बयानबाजी कर रहा है. आदिवासी सरलीकरण के विरोध में नहीं हैं. बल्कि कुछ लोग जबरन इसका विरोध निजी स्वार्थ के लिए करा रहे हैं.
सुधार के फायदे व नुकसान पर विपक्ष चाहे, तो डिबेट करा ले : सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन को लेकर विपक्ष चाहे तो फायदे व नुकसान पर डिबेट करा सकता है.
यह प्रमाणित हो जायेगा कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट के सरलीकरण से आदिवासी, मूलवासी व रैयतों का भला हुआ है. कोल्हान के सबसे पुराने नेता बागुन सुम्ब्रई ने भी सीएनटी एक्ट में सरलीकरण से होनेवाले आदिवासी हित को देखते हुए इसके पक्ष में बयान दिया है. रघुवर सरकार ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट से एसआर कोर्ट को हटा कर आदिवासी की जमीन हड़पने के सभी रास्तों को बंद कर दिया है.
इसमें संशोधन से आदिवासियों की जमीन पर आदिवासियों की ओर से गैरकानूनी रूप से चलाये जा रहे व्यापार को अब कानूनी अधिकार दे दिया गया है. इससे छोटे उद्योग धंधे कर अच्छी आमदनी के लिए आदिवासियों का रास्ता साफ हो गया है.
