सीएनटी एक्ट में संशोधन नियम के विरुद्ध

चाईबासा : सीएनटी- एसपीटी एक्ट एक रूढ़ीजन्य कानून (कस्टमरी लॉ) है. यह कानून किसी संसद, विधानसभा या कानूनी जानकार ने नहीं बनायी है. इस कानून को अंग्रेजों ने पूर्ण रूप से मुंडारी खूंटकाटी समुदाय और भुइंयारी समुदाय के बीच में रहकर व समझ कर लिपिबद्ध किया है. इस कानून में संशोधन करने से पहले समुदाय […]

चाईबासा : सीएनटी- एसपीटी एक्ट एक रूढ़ीजन्य कानून (कस्टमरी लॉ) है. यह कानून किसी संसद, विधानसभा या कानूनी जानकार ने नहीं बनायी है. इस कानून को अंग्रेजों ने पूर्ण रूप से मुंडारी खूंटकाटी समुदाय और भुइंयारी समुदाय के बीच में रहकर व समझ कर लिपिबद्ध किया है. इस कानून में संशोधन करने से पहले समुदाय के साथ विचार विमर्श करना आवश्यक है.

इसके पहले भी हुए संशोधन के विषय में समुदाय को अंधकार में रखा गया. अब समुदाय जागरूक हो रहा है. इसलिए संशोधन का पुरजोर विरोध करेगा. उक्त बातें मानव अधिकार रक्षक कौशल्या मुंडा ने कहीं. उन्होंने साफ कर दिया कि वे विश्व बैंक की प्रतिनिधि नहीं हैं. मानव अधिकार रक्षक होने के नाते आदिवासी समाज की रूढ़ीवादी व्यवस्था और पारंपरिक रीति रिवाज को बचाये रखने के लिए वे भारत से यूएन की यात्रा लगातार 2014 से प्रत्येक वर्ष करती आ रही है.

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