बैंक और एटीएम में लंबी कतार, कैश की किल्लत

नोटबंदी . कैश संकट जारी, जनता परेशान शोभा की वस्तु बनी एटीएम की पूजा करेंगे ग्राहक चाईबासा : नोटबंदी के कारण पश्चिम सिंहभूम के बैंकों और एटीएम में सोमवार को 26वें दिन भी लंबी कतार लगी रही. लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है. दिसंबर की शुरुआत होने के कारण सैलरी व पेंशन के […]

नोटबंदी . कैश संकट जारी, जनता परेशान

शोभा की वस्तु बनी एटीएम की पूजा करेंगे ग्राहक
चाईबासा : नोटबंदी के कारण पश्चिम सिंहभूम के बैंकों और एटीएम में सोमवार को 26वें दिन भी लंबी कतार लगी रही. लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है. दिसंबर की शुरुआत होने के कारण सैलरी व पेंशन के लिए लंबी कतार लग रही है. एसबीआइ, बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक, पीएनबी, सेंट्रल बैंक में सोमवार को भी ग्राहकों की भीड़ रही. लोगों को बैंक से दो हजार, सौ, पचास, दस के नोट मिले. 500 रुपये के नये नोट नहीं आने के कारण 2000 रुपये के नोट के चलने में परेशानी हो रही है.
बैंक कर्मचारी व ग्राहक हो रहे अस्वस्थ. नोटबंदी के बाद बैंक कर्मचारियों की परेशानी भी बढ़ गयी है. कई बैंक कर्मचारियों ने स्वास्थ्य खराब होने के कारण छुट्टी ली है. कई बैंक कर्मचारी तबीयत खराब होने के बावजूद ड्यूटी कर रहे हैं. वहीं लंबी लाइन में घंटों खड़े रहने के कई लोगों की तबीयत बिगड़ रही है.
लंबी लाइन नहीं, कैश नहीं मिलने का मलाल. लंबी लाइन में घंटों इंतजार करने का लोगों का मलाल नहीं है, बल्कि बारी आने पर कैश न होना उनके लिए परेशानी का सबब बना है. बैंक प्रबंधक दावा कर रहे हैं कि अधिकतर एटीएम चल रही है. जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है. बैंक कर रहे स्वाइप मशीन का प्रचार. बैंकों की ओर से कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए स्वाइप मशीन का प्रचार शुरू किया गया है. गांव और कस्बों में मशीन का प्रचार के लिए जागरुकता रथ निकाला जा रहा है. 2000 का खुचरा नहीं मिलने से परेशानी. एटीएम से अब भी दो हजार रुपये के नोट निकल रहें है. वहीं खुदरा नहीं मिलने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है. छोटे नोट की किल्लत से परेशानी है. खातों से एक सप्ताह में 24,000 रुपये निकासी होने से कुछ राहत मिल रही है. अपने ही खाते से पैसे निकालने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में नोटबंदी का खासा असर पड़ा है. कैश की किल्लत से किसान व मजदूर परेशान हैं. किसान के पास बीज खरीदने का पैसा नहीं है. वहीं ठेकेदारों से पैसे नहीं मिलने के कारण मजदूर काम छोड़कर घरों में बैठे हैं.
एसपीजी मिशन स्कूल के पास एटीएम में रुपये खत्म होने के बाद कैश भरने पहुंचा वाहन.
हमारी कौन सुनेगा!.
पहले एक हजार रुपये तक की सब्जी बिक जाती थी. अब 200 रुपये तक का सब्जी बिकना मुश्किल हो रहा है.
-मातियास सिंकू, बड़ा लगीया
जुताई, बुवाई का काम ठप पड़ा है. इसके कारण ट्रैक्टर बेकार पड़ा है. खेती के समय ट्रैक्टर से होने वाली कमाई बंद है.
-ससन बिरुली, ग्रामीण बरकुंडिया
पैसे नहीं होने के कारण घान कटाई के समय हमारी मजदूरी मार खा रही है. किसान धान कटाई का पैसा नहीं दे पा रहे हैं. पैसा नहीं होने के कारण वे किसान के परिवार वाले मिलकर धान काट रहे हैं.
-नेपा गोप, खूंटपानी

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