– हर साल 60-70 हजार रुपये के धान बेचता था
– खेत में धान की बालियों से निकलने लगे पौधे
चाकुलिया : फैलिन ने चाकुलिया प्रखंड के किसानों की कमर तोड़ डाली है. किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है. बैंक से कर्ज ले कर खेती करने वाले एवं घर से पूंजी लगा कर खेती करने वाले डूब गये हैं.
सैकड़ों खेतों में धान की तैयार फसल पानी में डूबी पड़ी है. आलम यह है कि पानी में डूबे धान के पौधों में लगे धान से पौधे से निकल रहे हैं. फसल बर्बाद होने से किसान चिंतित हैं, परंतु उनका दर्द समझने वाला कोई नहीं है. उनके नुकसान का आकलन करने कोई नहीं पहुंचा है.
प्रखंड की कुचियाशोली पंचायत में मंगलवार को प्रभात खबर के प्रतिनिधि ने किसानों से मुलाकात की. कई किसानों ने खेत में डूबी धान की फसल और पौधों के धान से निकले पौधों को दिखाया. जीरापाड़ा के किसान लखींद्र कपाट ने कहा कि उसने केसीसी के तहत 25 हाजर कर्ज लेकर साढ़े तीन बीघा में धान की खेती की थी. धान की फसल पानी में डूब गयी.
पौधों में लगे धान से पौधे निकल रहे हैं. हर साल वह 60-70 हजार रुपये का धान बेचता था, परंतु इस साल फसल मारी गयी है. देवंती राणा, शेखर राणा, शुरू राणा, गणोश नायक, शशांक नायक, देबू नायक, दशरथ नायक समेत अन्य कई किसानों ने कहा कि उनके खेत में धान की फसल पानी में डूब गयी है. पौधों में लगे धान से पौधे निकल रहे हैं. किसानों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि उनकी सुधि किसी ने नहीं ली है. फैलिन से भारी नुकसान हुआ है. धान की फसल की बर्बादी यह मंजर प्रखंड क्षेत्र की लगभग सभी पंचायतों में है.
– ट्राइ साइकिल से सब्जी बेच रहा
– नि:शक्त गणोश नायक की जीवटता
– एक पैर से नि:शक्त है कुशमाटी का गणोश नायक
– दूसरे की ट्राई साइकिल से गांवों में घूम–घूम कर सब्जी बेचता है
– राजन सिंह –
चाकुलिया : चाकुलिया की कुचियाशोली पंचायत के कुशमाटी गांव निवासी एक पांव से नि:शक्त गणोश नायक अपनी जीवटता और दृढ़ इच्छा शक्ति से नि:शक्तता को मात दे डाली है. अभिशाप को वरदान में बदल डाला है. वह किसी पर बोझ नहीं है. गणोश नायक नि:शक्तों के लिए एक मिसाल है.
वह तो अपनी ट्राइ साइकिल पर सब्जी लाद कर गांवों में घूम–घूम कर बेचता है और अपना परिवार चलाता है. मंगलवार को गणोश नायक जीरापाड़ा गांव में अपनी ट्राइ साइकिल के सहारे टमाटर बेच रहा था. गणोश ने बताया कि उसे एक ट्राइ साइकिल भी नहीं मिली है. वह किसी दूसरे की ट्राइ साइकिल लेकर सब्जी बेचता है. सब्जी बेच कर वह हर रोज कमाई करता है और इसी से उसका परिवार चलता है. उसने कहा कि इस व्यापार में उसकी पत्नी सबिता नायक मदद करती है.
बाजार से सब्जी खरीद कर लाती है व बेचता है. उसने कहा कि उसे तीन पुत्रियां हैं. विकलांग भत्ता के रूप में उसे प्रति माह 200 रुपये मिलते हैं. इससे परिवार चलाना संभव नहीं है, इसलिए वह सब्जी का व्यापार करता है. इंदिरा आवास नहीं मिला है.
छह माह पलायन करता है
गणोश नायक ने बताया कि छह माह सब्जी बेच कर गुजारा करता है. छह माह के लिए वह अपनी पत्नी सबिता के साथ पश्चिम बंगाल में पलायन करता है. वहां पर पत्नी ईंट भट्ठा में मजदूरी करती है. अपनी पुत्रियों को घर में छोड़ देता है. बड़ी बेटी दो बहनों की देखभाल करती है.
