चक्रधरपुर/बंदगांव : गुवा गोली कांड के शहीदों के 8 आश्रितों को सरकारी नौकरी का पत्र मिलने के बाद झारखंड आंदोलन व जंगल आंदोलन के शहीदों को परिवारों में एक उम्मीद की किरण जाग गयी है.
अब वे भी सम्मान व नौकरी के बारे में सोचने लगे हैं. आखिर सोचे भी क्यों नहीं, उनके घर वालों ने अपने जान की शहादत देकर ही अलग झारखंड राज्य की स्थापना कराया है. इनमें दो शहीद परिवार बंदगांव में है. एक शहीद मछुवा गागराई का परिवार है और दूसरा शहीद लाल सिंह मुंडा का परिवार है. दोनों शहीदों की प्रतिमाएं टोकाद व नकटी में स्थापित है.
गुवा शहादत दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा किया है कि बंदगांव प्रखंड के शहीद लाल सिंह मुंडा व शहीद मछुवा गागराई के आश्रितों को जल्द ही सरकारी नौकरी दी जायेगी. इस घोषणा के बाद बंदगांव में हर्ष की लहर है.
शहीद लाल सिंह मुंडा को 1-11-1984 को तथा शहीद मछुवा गागराई को 11-12-1989 को शहीद कर दिया गया था. तब से झामुमो समेत अन्य दलों द्वारा भी शहीदों के परिवार वालों को मुआवजा व नौकरी देने की मांग की जा रही थी.
शहीद लाल सिंह मुंडा व शहीद मछुवा गागराई के शहादत दिवस पर चाईबासा के विधायक दीपक बिरुवा ने घोषणा किया था कि जब झारखंड में झामुमो की सरकार बनेगी तो शहीद के परिवारों को सम्मान व नौकरी दी जाएगी. उनका यह घोषणा आज सफल होता प्रतीत नजर आ रहा है.
दीपक बिरूवा के अथक प्रयास से गुवा गोली कांड में शहीद 8 परिजन को सीएम द्वारा नियुक्ति पत्र दी गयी है. शहीद लाल सिंह मुंडा की धमपत्नी जासमीन हामसाय व शहीद मछुवा गागराई के पुत्र सिकंदर जामुदा कहते हैं कि झामुमो को शहीद परिवारों के दर्द का एहसास है. अब तक घोषणाएं होती थी, लेकिन अब काम हो रहा है. शहीद के परिवारों को सम्मान व नौकरी मिलना खुशी की बात है.
झामुमो नेता मिथुन गागराई मानते हैं कि आगामी 11 दिसंबर को जब शहीद मछुवा गागराई की शहादत दिवस मनाया जायेगा तब मुख्यमंत्री के हाथों बंदगांव के दोनों शहीद परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी का पत्र मिलेगा.
