कुटुंबा (औरंगाबाद) : ‘बादल बेदर्द भये, इंद्र भये बेपीर, पूरा आषाढ़ बीत गये, पर जरा न बरसे नीर’ कहावत कुटुंबा प्रखंड में चरितार्थ हो गयी है. बरसात का पहले महीने आषाढ़ के आद्र्रा व पुनर्वसु नक्षत्र बीत चुके हं. सावन का महीना भी आ गया है. लेकिन, खेतों में अब भी जेठ के महीनों जैसी धूल उड़ रही है.
एक तरफ भदई सब्जी की फसल मारी गयी, तो दूसरी तरफ बिचड़े सूख रहे हैं. अरहर व मक्का की खेती हुई नहीं. धान का कटोरा कहा जानेवाला यह प्रखंड वीरना पड़ा है. नहर के टूटने के कारण भारी क्षति हुई है. किसान त्रहिमाम कर रहे हैं.
रूक–रूक कर आकाश में उमड़ते–घुमड़ते बादलों की बेदर्दी से किसान परेशान हैं. वर्षा हो नहीं रही है. नौ से 10 बजते–बजते तेज गरम हवा बह रही है.
प्रखंड के किसी भी गांव में धान की रोपनी एक प्रतिशत भी नहीं हुई है. बिचड़े जलने लगे हैं. साधन संपन्न किसान किसी तरह से बिचड़े की सिंचाई कर रहे हैं. साधनहीन किसान आसमान की ओर टकटकी लगाये हुए हैं.
इस संबंध में प्रखंड के किसानों का कहना है कि धान की रोपनी हुई नहीं. भदई सब्जी की फसल भी मारी गयी. सिंचाई के अभाव में रबी की भी उपज अच्छी नहीं हुई थी. गत वर्ष औने–पौने दाम में धान बेच दिया गया था.
अब बार–बार घाटे से उनकी स्थिति नाजुक हो गयी है. प्रभारी बीडीओ अभय कुमार जब से प्रभार में आये हैं, डीजल पटवन अनुदान की राशि व वृद्धा पेंशन वितरण में भी रोक लगा रखी है. ऐसी स्थिति में दूसरे प्रदेशों में मजदूरी करने के लिए पलायन करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रह गया है.
