हर दिन एक नया चुआं खोदती हैं महिलाएं, तब बुझती है प्यास

नोवामुंडी : भीषण गर्मी से जहां तालाब एवं कुआं सूख गये हैं या सूखने के कगार पर हैं, वहीं लगातार गिरते भू-जल स्तर से चापाकलें जवाब देने लगे हैं. यही स्थिति हमसदा गांव की है. यहां भू-जल स्तर घटने से गांव के दो चापकल ठप हो गये हैं. ऐसे में यहां के ग्रामीणों को चुआं […]

नोवामुंडी : भीषण गर्मी से जहां तालाब एवं कुआं सूख गये हैं या सूखने के कगार पर हैं, वहीं लगातार गिरते भू-जल स्तर से चापाकलें जवाब देने लगे हैं. यही स्थिति हमसदा गांव की है. यहां भू-जल स्तर घटने से गांव के दो चापकल ठप हो गये हैं. ऐसे में यहां के ग्रामीणों को चुआं के गंदे पानी से अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है.

आदिवासी बहुल इस गांव की आबादी करीब पांच सौ है. यहां जीविकोपार्जन वनोत्पाद पर आधारित है. गांव में सड़क तक नहीं है. हमसदा गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है, जिसमें गांव के सिंघराय सावैंया पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं. चापाकल ठप होने से बच्चों का मध्याह्न भोजन भी चुअां के गंदे पानी से ही बनता है. एकीकृत बिहार के समय ग्रेड-1सड़क बनीं थीं, जिसका अब नामोनिशान भी मिट गया है.

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