चाईबासा कुपोषण उपचार केंद्र से संतुष्ट दिखी टीम

चाईबासा : झारखंड स्टेट यूनिसेफ की टीम पश्चिमी सिंहभूम जिले में दो दिवसीय दौरे पर आयी है. टीम अलग-अलग टुकड़ी में बंटकर यूनिसेफ की ओर से बच्चों के लिए चलाये जा रहे आंगनबाड़ी केंद्र व कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी), स्पेशल केयर न्यू बोर्न यूनिट (एससीएनयू)की जांच कर रही है. एक टीम बुधवार को सारंडा और […]

चाईबासा : झारखंड स्टेट यूनिसेफ की टीम पश्चिमी सिंहभूम जिले में दो दिवसीय दौरे पर आयी है. टीम अलग-अलग टुकड़ी में बंटकर यूनिसेफ की ओर से बच्चों के लिए चलाये जा रहे आंगनबाड़ी केंद्र व कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी), स्पेशल केयर न्यू बोर्न यूनिट (एससीएनयू)की जांच कर रही है. एक टीम बुधवार को सारंडा और दूसरी टीम सदर अस्पताल जांच करने पहुंची. सदर अस्पताल में सात सदस्यीय टीम ने कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) और स्पेशल केयर न्यू बोर्न यूनिट (एससीएनयू), पाकशाला, मुख्यमंत्री दाल-भात केंद्र का निरीक्षण किया. एक घंटा तक टीम ने कुपोषण उपचार केंद्र और एससीएनयू की जांच की. केंद्रों में पदस्थापित डॉक्टरों से समस्याओं के बारे में जानकारी ली. एमटीसी की सुविधा देख टीम ने खुशी जाहिर की.

टीम ने कहा कि पूरे झारखंड में चाईबासा एमटीसी सबसे अच्छी है. केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ जगन्नाथ हेंब्रम को और बेहतर बनाने का निर्देश दिया. टीम ने सदर प्रखंड के गीतिलपी आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया. चाईबासा में टीम का नेतृत्व डॉ वेनेश महतो ने किया. वहीं डॉ प्रेमचंद व तीन महिला सदस्य और सदर के उपाधीक्षक डॉ चंद्रावती बोयपाई, अस्पताल प्रबंधक जीरेन कंडुलना व यूनिसेफ के सदस्य शामिल थे. टीम ने कुछ बताने से इनकार दिया. डॉ वेनेश महतो ने कहा कि अभी टीम जांच में लगी है. कमियों की रिपोर्ट स्टेट में सौंपी जायेगी. विदित हो कि सरकार मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रयासरत है. यूनिसेफ की ओर से मातृ-शिशु दर कमी लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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