चक्रधरपुर : रमजान के दिनों में रोजेदार खजूर से अफतार करते हैं. खजूर खाना नबी की सुन्नत भी है. खजूर सैंकड़ों प्रकार के होते हैं. लेकिन इनमें सबसे अफजल अजवा खजूर है. जिसमें नबी की दुआ शामिल है. जिस कारण अनेकों प्रकार की बीमारियों में भी अजवा खजूर शिफा बख्शता है. अजवा खजूर क्यों और कैसे अफजल हुई. इसका एक वाक्या है. अरब शहर में हजरत बिलाल हब्शी (र.) ने एक बाग के झाड़ झंकार से खजूर चुनें. ऐसी खुजूर थी जो सिर्फ शहर के इसी बाग में लगी थी, लेकिन लोगों को इस खजूर से कोई लगाव नहीं था, इसलिए कि उस खजूर में वो नरमी नहीं थी, ना उसका वो जायका था. हजरत बिलाल खजूर झोली में डाल शहर में बेचने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन शहर में कोई इन खजूरों को नहीं खरीद रहा था.
खजूरों में सबसे अफजल अजवा खजूर, नबी की दुआ शामिल
चक्रधरपुर : रमजान के दिनों में रोजेदार खजूर से अफतार करते हैं. खजूर खाना नबी की सुन्नत भी है. खजूर सैंकड़ों प्रकार के होते हैं. लेकिन इनमें सबसे अफजल अजवा खजूर है. जिसमें नबी की दुआ शामिल है. जिस कारण अनेकों प्रकार की बीमारियों में भी अजवा खजूर शिफा बख्शता है. अजवा खजूर क्यों और […]

यहां तक की एक शख्स ने यूं आवाज लगायी, ऐ बिलाल यह खजूर तो तुझ जैसी ही काली है और खुश्क भी. बिलाल हब्शी खजूर समेट कर बैठे रहे, कि ऐसे में वहां से नबी हजरत मोहम्मद (स.) का गुजर हुआ. आपने बिलाल रजिअल्लाह अन्हु से सब माजरा पूछा और फिर आप लोगों से मुखातिब हुए और फरमाया,“ऐ लोगों ये खजूर “अजवा ” है ये दिल की मर्ज वालों के लिए शिफा है, ये फालिज के लिए शिफा है, ये सतर-ए-इमराज के लिए शिफा है, और लोगों ये खजूरों की सरदार है,
और फिर फरमाया जो इसे खा ले उसे जादू के असर से हिफाजत है, फिर क्या था. मंजर बदल गया वो बिलाल रजिअल्लाह अन्हु जिसके पास चंद लम्हे पहले तक झाड़ झंकार था, अब रसूल-ए-खुदा मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे गनी कर दिया. लोग बिलाल की मिन्नतें करते और बिलाल किसी मचले हुए बच्चे की मानिंद आगे आगे भागते, तारीख गवाह है, कि वो जिसे कभी दुनिया झाड़ झंकार समझ रही थी, बिलाल रजिअल्लाह अन्हु की झोली में आकर और मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जबान-ए-मुबारक का सदका है कि आज भी “अजवा ” तमाम खजूरों की सरदार है.