महिलाओं को पढ़ा रहीं शक्ति स्वरूपा का पाठ
गरीब आदिवासी महिलाओं को बचत के लिए निपुण बनाने के बाद सीखा रही है मार्केटिंग के गुर
मनोहरपुर : नवरात्र पर मां दुर्गा की पूजा अर्चना भक्ति भाव के साथ की जा रही है. वहीं हमारे समाज में भी कई महिलाएं सकारात्मक सोच और बेहतर बदलाव के लिए साथ खुद शक्ति स्वरूपा होने का एहसास दिला रही है. आनंदपुर प्रखंड में भी ऐसी महिलाएं हैं, जो अपने कामों की बदौलत किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. आनंदपुर प्रखंड की नवचिराग महिला समिति की महिलाएं अपने द्वारा संचालित दीदी बैंक के मार्फत से प्रखंड की महिलाओं को बचत का गुर सिखाने के बाद उन्हें अब मार्केटिंग भी सीखा रही है. महिलाओं को कपड़ा व्यवसाय से जोड़कर महिला समिति एवं ग्रामीणों को उचित दर पर कपड़ा मुहैया कर रही है.
इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बना रही है. कैसे हुई स्थापना : समेकित जनविकास केंद्र, जमशेदपुर के दिशा निर्देश पर जुलाई 2009 में प्रखंड की सत्रह (17) महिला समूहों के साथ महज 1900 रुपये से नवचिराग सहकारी समिति द्वारा दीदी बैंक की स्थापना की गई थी. जिसके बाद प्रखंड के सभी महिला समूहों को अपने बैंक से जोड़ते हुए महिलाओं को बचत सिखाया. वर्तमान में दीदी बैंक का कारोबार पांच लाख से भी अधिक पहुंच चुका है और 70 महिला समूहों के 935 महिलाओं को घरेलु खर्च से बचत करना सिखाया. महिला समूहों या सदस्यों को बकरी पालन, मुर्गी पालन, खेती वाड़ी सहित छोटे-बड़े सभी कार्यों के लिए लोन भी दिया जाता है.
कैसे शुरू हुआ व्यापार : लगभग तीन साल पहले इस क्षेत्र में बढ़ रहे मलेरिया की रोकथाम के लिए समिति द्वारा मच्छरदानी मंगवाकर बेचा गया. अब महिला समूहों की महिलाओं द्वारा उचित दर पर कपड़ा भी बेचा जा रहा है. जिससें महिलाओं को मुनाफा हो रहा है.
समिति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ कर आत्मनिर्भर बनाना है. कपड़े का व्यवसाय भी इसलिए किया गया है कि गरीबों तक उचित मूल्य में कपड़ा मुहैया कराया जा सके.
एंजेला लकड़ा, अध्यक्ष, नवचिराग सहकारी समिति, चारबंदिया
