लेडी टार्जन’ ने 50 हेक्टेयर वन भूमि को माफियाओं से बचाया
चाकुलिया : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मातुरखम गांव की रहने वाली जमुना टुडू का चयन वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड 2017 के लिए किया गया है. इस पुरस्कार के लिए देश भर से कुल तीन हजार आवेदन आये जिनमें से सिर्फ 12 ऐसी महिलाओं का चयन किया गया जो बदलाव की वाहक बनीं.
‘लेडी टार्जन’ के नाम से मशहूर जमुना टुडू और उनके बनाये समूह की महिला सदस्यों ने अपने गांव के पास वन माफियाओं से लोहा लेते हुए 50 हेक्टेयर वन भूमि को संरक्षित करने का काम किया है. माफिया ताकतों से उन्होंने अपने साहस और तीर-धनुष के सहारे लंबी लड़ाई लड़ी.
नीति आयोग यह अवार्ड मायगॉव (Mygov) पर और संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से देता है.
आवेदनों के चयन में पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव, पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी पीटी उषा, भारतीय एयरफोर्स की विंग कमांडर पूजा ठाकुर, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, नीति आयोग के सीइओ अमिताभ कांत आैर संयुक्त राष्ट्र के रेसीडेंट कोऑर्डिनेटर यूरी अफनासिव की समिति ने ऐसी 12 महिलाओं
का चयन किया, जो चेंज मेकर साबित हुई.
जमुना के अलावा इन 11 महिलाओं का चयन
कुल 12 लोगों में उत्तर प्रदेश से लक्ष्मी अग्रवाल और अरुणिमा सिन्हा, पश्चिम बंगाल से सुभाषिणी मिस्त्री, महाराष्ट्र की शफीना हुसैन, कमल कुंभर, हस्नी कान्हेकर व सुमिता कांबले, कर्नाटक से राजलक्ष्मी, हरियाणा से किरन कनोजी, मेघालय से सीमा माेडक और मध्य प्रदेश से कनिका टेकरीवाल का चयन अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने के लिए किया गया है.
महिलाओं को संगठित कर किया माफियाओं से वन बचाने का साहसिक काम
पूर्वी सिंहभूम जिले के मातुरखम की रहने वाली हैं जमुना टुडू
तीर-धनुष व लाठी के सहारे लड़ी लंबी लड़ाई
पिछले कई सालों से मातुरखम गांव के आसपास घने साल के जंगल वन माफिया काटे जा रहे थे. लेकिन ओड़िशा की रहने वाली जमुना टुडू की जब शादी जब इस गांव में हुई तो माफियाओं की शामत आने लगी. जमुना यह देख कर दुखी होती कि माफिया आदिवासी परंपराओं और कानूनों की परवाह किये बिना मनमाने तरीके से साल के पेड़ काट लेते हैं. उन्हें यह बात और परेशान करती कि समुदाय इसे लेकर उदासीन रवैया अपनाये हुए है. 17 साल की जमुना ने खुद लड़ने का मन बनाया. इसके लिए उसने गांव की 25 महिलाओं का समूह बनाया Â बाकी पेज 15 पर
और उन्हें तीर-धनुष, लाठी से लैस कर माफियाओं से लड़ने लगी. पिछले 15 सालों में माफियाओं के साथ कई संघर्ष हुए. इससे समाज भी जागरूक हुआ. जमुना ने वन सुरक्षा समिति का गठन किया और वह 50 हेक्टेयर वन भूमि को संरक्षित करने में सफल रही. उसके साहस को देखकर ही समुदाय के लोग उसे ‘लेडी टार्जन’ कहने लगे.
वन सुरक्षा समिति में 60 सक्रिय महिला सदस्य हैं जो जंगल की निगरानी सुबह, दोपहर और शाम, तीन शिफ्ट में करती हैं. कभी-कभार जब माफिया रात में जंगल में आग लगाने की कोशिश करते हैं तो रात में भी निगरानी की जाती है. जमुना की इस साहसिक लड़ाई को देखते हुए राष्ट्रपति ने भी वन संरक्षण के लिए पुरस्कार दिया है.
मिल चुका है गोडफ्रे फिलिप्स ब्रेवरी अवार्ड
वर्ष 2013 में सामाजिक साहस के क्षेत्र में जमुना को गोडफ्रे फिलिप्स ब्रेवरी अवार्ड मिला. मातुरखन अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्र में आता है और ऐसे में वन संरक्षण का काम कम चुनौतीपूर्ण नहीं है. मौजूदा समय में वह कोल्हान क्षेत्र में विभिन्न वन समितियों के जरिये जागरुकता अभियान चला रही हैं. वन बचाने के जमुना के आंदोलन में 150 समितियां काम कर रही हैं और इसके लगभग छह हजार सदस्य हैं. वन विभाग ने मातुरखम गांव को गोद लिया है जिसके कारण गांव में पानी की सप्लाइ और स्कूल की सुविधा मिल पायी.
