JPSC Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व सदस्य अनिमा हांसदा ने बड़ा खुलासा किया है. अनिमा हंसदा ने आयोग की कार्यप्रणाली और अपने कार्यकाल के दौरान सामने आये विवादों को लेकर कई गंभीर बातें कही हैं. टीडीपीएल एजेंसी के चयन से लेकर 11वीं और 13वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के रिजल्ट तक उन्होंने अपनी भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी है. उनका कहना है कि टीडीपीएल एजेंसी के चयन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और न ही वह एजेंसी से जुड़े किसी व्यक्ति को जानती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि रिजल्ट में त्रुटियों के बावजूद स्क्रूटनी का दबाव बनाया गया, जिसका उन्होंने विरोध किया. कुरमाली का रिजल्ट बदलने के दबाव से लेकर जेपीएससी में कथित गड़बड़ियों की जानकारी सरकार तक पहुंचाने के प्रयास का भी उन्होंने जिक्र किया. अपने ऊपर लगे कोचिंग सिंडिकेट और पैसे के लेन-देन से जुड़े आरोपों को अनिमा हंसदा ने पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया है.
प्रस्तुत है प्रभात खबर के प्रमुख संवाददाता विवेक चंद्र के साथ उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश.
सवाल : आपने जेपीएससी में गड़बड़ियों की जानकारी सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की थी?
अनिमा हंसदा : हां.जेपीएससी में हो रही गड़बड़ियों और त्रुटियों के संबंध में मैंने मुख्यमंत्री को सूचित करने के लिए उनके पीएसओ से 16 जून 2026 को संपर्क कर मिलने का समय मांगा था, लेकिन मुख्यमंत्री की व्यस्तता के कारण मुझे समय नहीं मिल सका.
सवाल : इसके बाद आपने क्या कदम उठाया?
अनिमा हंसदा : 17 जून 2026 को मैंने माननीय उच्च शिक्षा मंत्री, जो मेरे विधायक भी हैं, को फोन पर इस संबंध में सूचित करना चाहा, लेकिन उन्होंने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और बात टाल दी.
सवाल : इसके बाद आपको सभी सदस्यों को त्यागपत्र देने का निर्देश मिला?
अनिमा हंसदा : जब बातें आगे बढ़ीं, तो 22 जुलाई 2026 की सुबह 7:12 बजे माननीय मंत्री ने सूचित किया कि हम सभी सदस्यों को त्यागपत्र देना है. इसका अनुपालन मेरे द्वारा किया गया. जबकि जेपीएससी में हुई गड़बड़ियों में मेरी कोई सहभागिता नहीं रही है.
सवाल : आप अपने ऊपर लगे आरोपों को किस नजर से देखती हैं?
अनिमा हंसदा : मेरे ऊपर लगाये गये आरोप सरासर गलत, बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं. मैंने हमेशा अपने स्तर से प्रक्रिया और संवैधानिक जिम्मेदारियों का पालन करने की कोशिश की. जहां मुझे गलत लगा, वहां मैंने विरोध किया और संबंधित स्तर पर इसकी जानकारी देने का प्रयास भी किया.
सवाल : टीडीपीएल एजेंसी के चयन में आपकी क्या भूमिका थी?
अनिमा हंसदा : टीडीपीएल एजेंसी का चयन कैसे किया गया, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है. मैं अभय तिवारी को नहीं जानती हूं और न ही उनसे कभी मिली हूं या कोई बातचीत हुई है.
सवाल : आरोप है कि टीडीपीएल के निदेशकों ने जेपीएससी कार्यालय में प्रेजेंटेशन दिया था और आयोग के सभी सदस्य वहां मौजूद थे. क्या यह सही है?
अनिमा हंसदा : यह बात पूरी तरह असत्य और सरासर झूठ है. टीडीपीएल के दो निदेशकों ने रामवीर सिंह और सत्यपाल बोकारे के सामने जीपीएससी कार्यालय में प्रेजेंटेशन दिया था, ऐसा कहा जा रहा है, लेकिन मैं उस प्रेजेंटेशन में उपस्थित नहीं थी. टीडीपीएल के किसी कर्मचारी को भी मैं नहीं जानती हूं. चयन प्रक्रिया के प्रतिवेदन में मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं और मैंने उनका प्रेजेंटेशन भी नहीं देखा है.
सवाल : एजेंसी के चयन की प्रक्रिया को लेकर जब सवाल उठे, तब आपने क्या किया?
अनिमा हंसदा : मैंने एजेंसी के बारे में पूछा था. उस समय अध्यक्ष मुझ पर विपरीत टिप्पणी करने लगे. मैंने इसका विरोध किया. इसके बाद उन्होंने धमकी दी कि मेरे विरोध की शिकायत राज्यपाल महोदय से कर मुझे सदस्य पद से हटा दिया जायेगा. इसकी मौखिक सूचना मैंने मुख्यमंत्री को भी दी थी.
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सवाल : 11वीं और 13वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के रिजल्ट को लेकर भी सवाल उठे हैं. क्या आपने रिजल्ट पर हस्ताक्षर किये थे?
अनिमा हंसदा : मैंने 11वीं और 13वीं सिविल सेवा के मेन्स रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किये थे. उसमें कई त्रुटियां थीं और इसकी सूचना मैंने माननीय उच्च शिक्षा मंत्री को दी थी.
सवाल : क्या आपने रिजल्ट की स्क्रूटनी करने से इनकार किया था?
अनिमा हंसदा : हां. अध्यक्ष ने मुझसे 11वीं और 13वीं सिविल सेवा मेन्स रिजल्ट की स्क्रूटनी करने को कहा था, लेकिन मैंने अस्वीकार कर दिया. इसके बाद मुझसे स्पष्टीकरण यानी शो-कॉज पूछा गया, जिसका मैंने जवाब दिया.
सवाल : आपके और पूर्व अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा के बीच मतभेद की वजह क्या थी?
अनिमा हंसदा : पूर्व अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा ने मुझसे कुरमाली का रिजल्ट बदलने का दबाव दिया था. मैंने साफ तौर पर मना कर दिया. उसी दिन से उनके साथ मेरा संबंध प्रतिकूल हो गया और मुझे कई संवैधानिक कार्यों से वंचित रखा गया.
सवाल : टीडीपीएल प्रकरण में आपका नाम एक कथित कोचिंग सिंडिकेट से भी जोड़ा गया है. आप क्या कहेंगी?
अनिमा हंसदा : मेरे ऊपर लगाया गया यह आरोप सरासर गलत और बेबुनियाद है. मैं अभय तिवारी को नहीं जानती हूं. मैं किसी पतंजलि कोचिंग के संचालक रवि कुमार को भी नहीं जानती और न पहचानती हूं. मेरा उनसे कभी कोई वास्ता नहीं रहा है और न ही मैंने किसी कैंडिडेट को पैसे लेकर पास कराया है.
सवाल : आरोप है कि अभय तिवारी ने सीआइडी को दिये बयान में कई लोगों के नाम लिये हैं. आपका क्या कहना है?
अनिमा हंसदा : मैंने पहले भी स्पष्ट किया है कि मैं न अभय तिवारी को जानती हूं, न रामवीर सिंह को और न ही आदित्य पांडेय को. लेन-देन की बात तो दूर की बात है. मेरा इन लोगों से कोई संबंध नहीं है.
सवाल : 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा के इंटरव्यू में कथित पैसे के लेन-देन को लेकर भी आरोप लग रहे हैं.
अनिमा हंसदा : ये आरोप भी सरासर झूठ और मनगढ़ंत हैं. मैं अभय तिवारी, रामवीर सिंह, रवि कुमार या किसी कोचिंग संस्थान से जुड़े व्यक्ति को नहीं जानती हूं. ऐसे किसी लेन-देन में मेरी कोई भूमिका नहीं रही है.
