Mineral Rights Tax in India : केंद्र सरकार ने खनिज अधिकारों और खनिज युक्त जमीन पर राज्यों की ओर से टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने के अधिकार को सीमित कर दिया है. संसद से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी 17 अगस्त को मिल गयी. इसके बाद कानून को भारत के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है. हालांकि, यह अधिनियम केंद्र सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना जारी किये जाने की तारीख से प्रभावी होगा. संशोधित कानून में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 2 में ‘मिनरल बेयरिंग लैंड’ यानी खनिज युक्त जमीन को भी शामिल किया गया है. इसके तहत ऐसी जमीन का निर्धारण निर्धारित मानकों के आधार पर किया जायेगा.
केंद्र की शर्तों के अनुसार ही लग सकेगा कोई शुल्क
संशोधन के तहत नयी धारा 9डी जोड़ी गयी है. इसमें स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार खनिज अधिकारों या खनिज युक्त जमीन पर खनिज की मात्रा, खनिज के मूल्य, रॉयल्टी की देयता या किसी अन्य आधार पर टैक्स, सेस अथवा अन्य लेवी नहीं लगा सकेगी, जब तक कि केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित शर्तों और प्रतिबंधों के अनुरूप ऐसा न किया जाये. इसका मतलब है कि खनिज अधिकारों और खनिज युक्त जमीन पर कराधान को लेकर राज्यों के अधिकार पर केंद्र का नियमन बढ़ेगा. केंद्र सरकार ही ऐसे टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने की शर्तें और सीमाएं निर्धारित करेगी.
पहले से वसूली गयी राशि वापस नहीं होगी
संशोधन अधिनियम में पहले से लगाये गये ऐसे टैक्स, सेस या अन्य लेवी को लेकर भी प्रावधान किया गया है. कानून लागू होने से पहले यदि ऐसी राशि राज्य सरकार ने जमा नहीं की है या वसूल नहीं की है, तो उसे सभी महत्वपूर्ण समयों के लिए अमान्य माना जायेगा. वहीं, अधिनियम के लागू होने से पहले जो राशि राज्य सरकार के पास जमा हो चुकी है या वसूल की जा चुकी है, उसे वापस नहीं करना होगा.
ये भी पढ़ें: झारखंड JPSC-JSSC Protest : JSSC सचिव सुधीर गुप्ता के ठिकानों पर CID की छापेमारी, खंगाले गए दस्तावेज
नियम बनाने का अधिकार केंद्र के पास
अधिनियम में खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 13 में भी संशोधन किया गया है. इसमें धारा 9डी के तहत टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने से संबंधित शर्तों और प्रतिबंधों को निर्धारित करने का प्रावधान जोड़ा गया है.
क्या बदला?
- खनिज अधिकारों पर राज्यों की ओर से टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने पर सीमा तय.
- खनिज युक्त जमीन को भी संशोधित कानून के दायरे में लाया गया.
- केंद्र सरकार तय करेगी कि किन शर्तों के तहत ऐसी लेवी लग सकती है.
- पहले से वसूल नहीं की गयी ऐसी राशि को अमान्य माना जायेगा.
- पहले ही जमा या वसूल की गयी राशि वापस नहीं होगी.
