बाल विवाह व नशापान रोकना हम सभी की जिम्मेवारी : पीडीजे
सिमडेगा को नशा व बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का लिया गया संकल्प
सिमडेगा. जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से शुक्रवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श कार्यशाला हुई. कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा, उपायुक्त कंचन सिंह, एडीजे नरंजन सिंह, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद आदि ने संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम में आगंतुकों का स्वागत प्राधिकार के सचिव मरियम हेमरोम ने किया. कार्यक्रम में पीडीजे राजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि बाल विवाह व नशा को रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है. बच्चों के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं है. सिमडेगा जिला बाल विवाह उन्मूलन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह कराने वालों के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में भी शिकायत की जा सकती है. उन्होंने नशा कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया. उन्होंने पुलिस प्रशासन से स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल केवल पैडलर्स या छोटे स्तर के लोगों तक सीमित न रहें, बल्कि इस पूरे नेटवर्क के मुख्य तस्करों तक पहुंच कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें. मौके पर स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष रमेश कुमार श्रीवास्तव, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद, चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव, छोटानागपुर कल्याण निकेतन की सचिव प्रियंका सिन्हा, सीजेएम निताशा बारला, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सुभाष बाड़ा समेत पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, पीएलवी आदि उपस्थित थे.
उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा कि हम भारत के लोग की भावना के अनुरूप सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है. उन्होंने कहा कि जब तक समाज को सामाजिक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक किसी भी क्षेत्र में वास्तविक प्रगति संभव नहीं है. समाज विभिन्न जाति, धर्म व संप्रदाय के लोगों से मिल कर बना है और हम सभी उसके अभिन्न अंग हैं. डीसी ने कहा कि बहु-हितधारक परामर्श एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच है, जहां प्रशासन, न्यायपालिका, पुलिस, सामाजिक संगठन और अन्य पक्ष एक-दूसरे की समस्याओं और दृष्टिकोण को समझ सकते हैं.
एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़े प्रावधान हैं : एडीजे
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरंजन सिंह ने एनडीपीएस एक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए इस कानून में कड़े दंड का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में अधिकतम सजा मृत्यु दंड तक हो सकती है. तलाशी व जांच की प्रक्रिया में आम नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण किया गया है तथा राजपत्रित अधिकारी या न्यायिक दंडाधिकारी की उपस्थिति में जांच का प्रावधान है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के दुरुपयोग की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है. समाज को नशामुक्त बनाना अधिनियम का मुख्य उद्देश्य है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
