मेहनत व नवाचार से मिसाल बनीं सुसराय सोरेंग, 50 डिसमिल में फूलों की खेती से रचा इतिहास

संसाधनों की कमी, दूर बाजार और सिंचाई की चुनौतियों के बीच भी कृषि को बनाया रोजगार का आधार

सिमडेगा. संसाधनों की कमी, बाजार की दूरी और सिंचाई जैसी चुनौतियों के बीच मेरोमडेगा की किसान सुसराय सोरेंग ने अपनी 50 डिसमिल जमीन पर मेहनत व नवाचार के दम पर एक अनूठी मिसाल कायम की है. बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भी उन्होंने खेती को रोजगार का मजबूत माध्यम बनाया है. सुसराय बताती हैं कि उनके गांव में किसानों के लिए अभी तक कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है. तैयार फसल को बेचने के लिए उन्हें अक्सर राउरकेला जाना पड़ता है, जहां उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता. बाजार की दूरी और परिवहन खर्च के बावजूद वे अपनी उपज जो भी कीमत पर बिकती है, बेचने को मजबूर हैं. उन्होंने आरसेटी से कृषि आधारित प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण के बाद उन्होंने पारंपरिक खेती की बजाय फूलों की खेती अपनायी. सुसराय कहती हैं कि फूलों में लागत कम और मुनाफा अधिक मिलता है. बाजार में फूलों की लगातार मांग रहती है, हालांकि वे पहली बार फूलों की खेती कर रही हैं और बाजार के बारे में अनुभव भी सीमित है. खेती में मेहनत की चुनौती को स्वीकारते हुए सुसराय कहती हैं कि अगर किसानों को उन्नत किस्म के बीज, बेहतर सिंचाई साधन खासतौर पर सोलर सिंचाई व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर बाजार की सुविधा मिल जाये, तो क्षेत्र के किसान काफी प्रगति कर सकते हैं.

सुसराय सोरेंग ने कहा

मेरे पास मेहनत है और खेती का ज्ञान भी. अगर सरकार या संस्थाओं की ओर से सिंचाई और उन्नत बीज की सुविधा मिले, तो 50 डिसमिल ही नहीं, उससे बड़ी जमीन भी संभाल सकती हूं. फूलों की खेती में भविष्य उज्ज्वल है और इससे अन्य किसानों को भी जोड़ा जा सकता है. इससे गांव में ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

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By Prabhat Khabar News Desk

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