सिमडेगा. मस्जिद-ए-बिलाल खैरानटोली में शब-ए-बरात के मौके पर विशेष कार्यक्रम हुआ. इसमें शब-ए-बरात की फजीलत और अहमियत पर प्रकाश डाला गया. मौके पर मस्जिद-ए-बिलाल के इमाम मौलाना मेराज उद्दीन साहब कासमी और मौलाना मिन्हाज साहब कासमी ने कहा कि शब-ए-बरात वह मुकद्दस रात है, जिसमें अल्लाह की रहमत हर बंदे के लिए आम होती है. उन्होंने बताया कि इस रात में सिर्फ अल्लाह से ही नहीं, बल्कि इंसानों से भी माफी मांगना चाहिए, क्योंकि दिल में नफरत या कीना रखने वालों की मगफिरत नहीं होती. उलेमा ने कहा कि शाबान वह महीना है, जिसमें साल भर के आमाल अल्लाह के पास पेश किये जाते हैं. दिल में दुश्मनी रखने वाला, मां-बाप का नाफरमान और शराब पीने वाला शब-ए-बरात की खास रहमतों से महरूम रह सकता है, जब तक कि वह सच्चे दिल से तौबा न कर ले. बताया गया कि मगरिब नमाज के बाद छह रकात नफ्ल नमाज पढ़ना चाहिए, जिसमें लंबी उम्र, बलाओं से हिफाजत और रिज्क में बरकत की दुआ करनी चाहिए. उलेमा ने कहा कि शाबान के महीने में कसरत से रोजे रखना सुन्नत है और शब-ए-बरात के अगले दिन का रोजा रखना अफजल माना गया है. कार्यक्रम में सदर हाजी लुकमान हैदर, मोहम्मद शफी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद थे. अंत में सामूहिक दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया.
शब-ए-बरात वह मुकद्दस रात है, जिसमें अल्लाह की रहमत बरसती है : मौलाना
मस्जिद-ए-बिलाल खैरानटोली में हुआ विशेष कार्यक्रम
