सेमेरिया में सड़क की बदहाल स्थिति पर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, कहा- रोड नहीं तो वोट नहीं

सेमेरिया गांव में सड़क की बदहाल स्थिति से नाराज ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन. ग्रामीणों ने आगामी चुनाव में रोड नहीं तो वोट नहीं का ऐलान कर प्रशासन को दी चेतावनी.

जलडेगा. जलडेगा प्रखंड के लमडेगा पंचायत अंतर्गत सेमेरिया गांव में सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश गुरुवार को खुलकर सामने आया. लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने ग्रामसभा की बैठक के बाद सड़क निर्माण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोंगाड़ी के खिलाफ जमकर नारे लगाए.

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा. ग्रामीणों ने “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा देते हुए आगामी चुनाव में सड़क निर्माण को मतदान से जोड़ने का ऐलान किया. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 20 वर्षों से गांव में सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या बनी हुई है. चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास के वादे किए जाते हैं और ग्रामीणों से वोट लिया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता.

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव की जर्जर सड़क के कारण आवागमन में काफी परेशानी होती है. बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है. सड़क की खराब स्थिति का असर विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों पर पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी उन्हें वर्षों से इंतजार करना पड़ रहा है.

स्थानीय विधायक पर भी ग्रामीणों ने क्षेत्र की समस्या की अनदेखी का आरोप लगाया. ग्रामीणों ने कहा कि अब वे किसी के समझाने या नए आश्वासन से अपना फैसला नहीं बदलेंगे. उनका कहना है कि जब तक सड़क निर्माण को लेकर धरातल पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक “रोड नहीं तो वोट नहीं” का निर्णय कायम रहेगा.

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे. जरूरत पड़ने पर ग्रामीण प्रखंड कार्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे.

सेमेरिया गांव में सड़क को लेकर हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में विकास और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग पर कब तक ठोस पहल होती है.

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By Ravikant

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