सिमडेगा. जिले में प्रकृति का महापर्व सरहुल पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से मनाया गया. मौके पर सिमडेगा में केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में शोभायात्रा निकाली गयी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. शोभायात्रा से पूर्व सलडेगा स्थित सरना पूजा स्थल पर पारंपरिक आस्था व श्रद्धा के साथ विधिवत पूजा संपन्न हुई. पाहन बाबूलाल उरांव व पाहन बिरसा मुंडा ने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करायी. पूजा की शुरुआत सरना स्थल की परिक्रमा से हुई. इसके बाद प्रकृति देवताओं की आराधना कर सुख, समृद्धि और शांति की कामना की गयी. इस दौरान श्रद्धालुओं को गुलाल का टीका लगाया गया और सखुआ फूल कानों में धारण कराया गया, जो सरहुल की विशेष पहचान है. केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र भगत ने कहा कि सरहुल आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति व पृथ्वी माता के प्रति आस्था व सम्मान का प्रतीक है. पूजा के बाद शोभायात्रा निकाली गयी. शोभायात्रा सलडेगा सरना स्थल से शुरू होकर सलडेगा चौक, प्रिंस चौक, झूलन सिंह चौक, महावीर चौक होते हुए नीचे बाजार पेट्रोल पंप तक पहुंची और पुनः वापस होते हुए पानी टंकी स्थित सरना स्थल पर आकर संपन्न हुई. शोभायात्रा में महिलाएं व युवतियां मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य करती नजर आयीं. सरहुल के गीतों से पूरा वातावरण गूंजता रहा. जुलूस में एसडीओ प्रभात रंजन ज्ञानी, एसडीपीओ बैजू उरांव, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पलटू महतो, सचिव विजय उरांव, पाहन बाबूलाल, पाहन बिरसा मुंडा, कोषाध्यक्ष माधी उरांव, सलडेगा सरहुल के संरक्षक लहरू सिंह, विहिप जिलाध्यक्ष कौशल राज सिंह देव, रमेश महतो, प्रधानाचार्य राजेंद्र साहु, आनंद जयसवाल, अनिरुद्ध सिंह, विंदेश्वर उरांव, खुनवा उरांव, संजय उरांव, सुबोध उरांव, शंकर भगत, संजीत तिर्की, ललिता उरांव, चंद्रिका भगत, बसंती भगत, सरस्वती उरांव, तीलिमा कुजूर, अगुस्टीना किंदो, अनुपमा कुजूर, पुष्पांजलि लकड़ा, सुशीला उरांव, अंजलिना बरला उपस्थित थे.
सरहुल आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व : अध्यक्ष
सिमडेगा में हर्षोल्लास से मनाया गया सरहुल पर्व, निकाली गयी शोभा यात्रा
