धूमधाम से मनाया गया सरहुल महोत्सव सह जेठ जतरा

सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र के पालकोट प्रखंड के टेंगरिया गांव में उल्लास के साथ सरहुल महोत्सव सह जेठ जतरा का आयोजन किया गया.

फोटो फाइल: 18 एसआइएम:1-पुरस्कार देते विधायक,2-गीत प्रस्तुत करती मंडली सिमडेगा. सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र के पालकोट प्रखंड के टेंगरिया गांव में उल्लास के साथ सरहुल महोत्सव सह जेठ जतरा का आयोजन किया गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विधायक भूषण बाड़ा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में पाकरटांड़ प्रखंड के जिप सदस्य जोसिमा खाखा, सांसद प्रतिनिधि बसंत कुमार गुप्ता, बांसजोर जिप सदस्य सामरोम पौल तोपनो, सरना प्रार्थना सभा के अध्यक्ष व विधायक प्रतिनिधि पुरुषोतम कुजूर, मंडल अध्यक्ष निमरोद एक्का, 20 सूत्री अध्यक्ष सह युवा कांग्रेस अध्यक्ष रोहित एक्का, संजय तिर्की, लीला नाग, पंचायत अध्यक्ष विनोद उरांव, सोमरा कुजूर, विजय किंडो उपस्थित थे. कार्यक्रम की शुरुआत विधायक भूषण बाड़ा ने किया. मौके पर अपने संबोधन में विधायक ने कहा कि सरहुल हमारी सांस्कृतिक की पहचान है. यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति सम्मान, भाईचारे और एकजुटता की भावना सिखाता है. हम सबका कर्तव्य है कि इन परंपराओं को सहेज कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचायें. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए वह प्रतिबद्ध हैं. इस अवसर पर उन्होंने पारंपरिक खोड़ा दल के सदस्यों को कंबल और नगाड़ा भी भेंट स्वरूप प्रदान किया. त्योहारों को मान-सम्मान दिलाने का कार्य किया:जोसिमा जिप सदस्य जोसिमा खाखा ने कहा कि विधायक भूषण बाड़ा सिर्फ एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि जनसेवक हैं. इन्होंने हमेशा गरीब, वंचित और आदिवासी समाज की आवाज़ को विधानसभा तक पहुंचाया है. आज जहां कई लोग सत्ता में जाकर जनता को भूल जाते हैं, वहीं भूषण बड़ा गांव-गांव जाकर हर घर की समस्या सुनते हैं और समाधान की कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा कि विधायक बनने के बाद भी उनका ग्रामीणों से जुड़ाव कम नहीं हुआ, बल्कि और मजबूत हुआ है. जोसिमा ने कहा कि टेंगरिया से लेकर राजधानी रांची तक इन्होंने हर जगह हमारे सरहुल, जतरा, करम जैसे त्येहारों को मान-सम्मान दिलाने का कार्य किया है. उन्होंने कहा कि आज महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं, तो उसके पीछे विधायक की सोच और योजनाओं का भी बड़ा योगदान है. सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ आयोजन सरहुल महोत्सव सह जेठ जतरा के मौके पर 90 से अधिक खोड़ा दलों ने अपनी प्रस्तुति दी. पारंपरिक पोशाकों में सजे आदिवासी युवक-युवतियों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर समा बांध दिया. सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को झूमने पर मजबूर कर दिया. पूरे आयोजन के दौरान ग्रामीणों में उत्साह और उमंग का माहौल रहा.

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Author: DEEPAK

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