शांति के लिए साधना की जरूरत होती है : डॉ पद्मराज स्वामी
जैन भवन में पर्यूषण महापर्व के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग सभा में भक्तों को संबोधित करते हुए कथावाचक आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज ने कहा जीवन में सत्संग ही कल्याण के मार्ग का प्रदर्शक है
By DEEPAK | Updated at :
सिमडेगा. जैन भवन में पर्यूषण महापर्व के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग सभा में भक्तों को संबोधित करते हुए कथावाचक आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज ने कहा जीवन में सत्संग ही कल्याण के मार्ग का प्रदर्शक है. इसके बिना जीवन की यात्रा सम्यक नहीं हो सकती. गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं एक घड़ी, आधी घड़ी, आधी पुनी आध. तुलसी संगत साधु की काटे कोटि अपराध अर्थात मात्र छ: मिनट का सत्संग भी आपके करोड़ों जन्मों के अपराध नष्ट कर सकता है. जिन साधक साधिकाओं ने ऐसा उपक्रम किया उन्हीं की कथा अंतगढ़ सूत्र के माध्यम से हम सब पारायण कर रहे हैं. आचार्य जी ने आगे कहा आपका ज्ञान ही सदाचार का जन्मदाता है. हमेशा सम्यक ज्ञान की आराधना करनी चाहिए. आचार्य जी ने बताया कि जीवन में सुख के साथ शांति भी आवश्यक है. हमें साधनों से सुख मिल सकता है, किंतु शांति के लिए साधना की जरूरत होती है. राजा के पास साधन होते है किंतु साधना नहीं होती. सन्यासी के पास साधना खूब होती है, परंतु साधन उतने नहीं होते. अतः साधन संपन्न होकर भी राजा को शांति पाने के लिए अक्सर संतों की शरण में जाना पड़ता रहा है. अष्ट दिवसीय अखंडपाठ के पंचम दिवस पर नवकार कलश यात्रा जयकारों और मंत्रोच्चार के साथ गर्ग भवन से रामजानकी मंदिर होते हुए जैन भवन पहुंची. रविवार को अखंडपाठ एवं प्रसाद वितरण का लाभ अशोक रेखा जैन, पवन मीरा जैन, मनोज सारिका जैन परिवार को प्राप्त हुआ. मंगलपाठ, आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ सभा संपन्न हुई.
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