सिमडेगाः मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साथ स्थायी परिसंपत्ति उपलब्ध कराने की पहल अब किसानों की आजीविका में बदलाव ला रही है. सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड स्थित मलसरा गांव की किरण मिंज की कहानी इसका उदाहरण है. आम बागवानी के जरिये उनके परिवार को आय का नया साधन मिला और कृषि भूमि के बेहतर उपयोग की राह खुली है.
मनरेगा से मिली आम बागवानी की योजना
अनुसूचित जनजाति परिवार से आने वाली किरण मिंज के परिवार में पांच सदस्य हैं. परिवार की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर रही है. सीमित संसाधनों के कारण खेती से नियमित और पर्याप्त आय हासिल करना चुनौतीपूर्ण था. ऐसे में मनरेगा के तहत स्वीकृत आम बागवानी की योजना परिवार के लिए नई उम्मीद लेकर आई. किरण मिंज की आम बागवानी योजना को वित्तीय वर्ष 2021-22 में 29 मई 2021 को स्वीकृति मिली. कुल 3 लाख 71 हजार 591 रुपये की लागत से आम बागवानी की परिसंपत्ति तैयार की गयी. योजना के क्रियान्वयन के दौरान 992 मानव-दिवस रोजगार का भी सृजन हुआ.
अंतरवर्ती खेती से अतिरिक्त आय का अवसर
आम के पौधों के बीच परिवार ने अरहर, मक्का और मौसमी सब्जियों की अंतरवर्ती खेती शुरू की. भिंडी, लौकी और टमाटर जैसी सब्जियों की खेती से कृषि भूमि का बेहतर उपयोग हुआ और परिवार के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी बने. मनरेगा के तहत सिंचाई के लिए कुएं की सुविधा मिलने से मिश्रित खेती को और मजबूती मिली. सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने के बाद परिवार के लिए कृषि गतिविधियों का विस्तार करना आसान हुआ.
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शून्य से 12 हजार रुपये तक पहुंची वार्षिक आय
योजना से पहले इस गतिविधि से परिवार की वार्षिक आय शून्य थी. योजना के बाद यह बढ़कर 12 हजार रुपये दर्ज की गयी. वहीं, सिंचित भूमि का क्षेत्रफल भी शून्य से बढ़कर एक एकड़ हो गया. परिवार के पास दो पशु भी हैं, जिससे कृषि के साथ पशुपालन आधारित आजीविका की संभावनाएं भी बढ़ी हैं. किरण मिंज का आम बागान अब केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि रोजगार, सिंचाई, अंतरवर्ती खेती और पशुपालन को जोड़कर तैयार की गयी टिकाऊ आजीविका का आधार बन गया है.
मनरेगा से मिला स्थायी आजीविका का आधार
योजना का लाभ मिलने पर किरण मिंज ने प्रखंड पदाधिकारियों, कर्मचारियों और पंचायत कर्मियों के प्रति आभार जताया. उनकी सफलता की कहानी बताती है कि मनरेगा केवल मजदूरी उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी परिसंपत्ति तैयार करने और आजीविका के नये अवसर विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है.
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