40 वर्षों तक शिक्षा व समाज सेवा में दिया महत्वपूर्ण योगदान

पुरना सामटोली चर्च परिसर में विशेष मिस्सा अनुष्ठान के साथ किया गया अंतिम संस्कार

सिमडेगा. सिमडेगा के पुरना सामटोली चर्च परिसर में दिवंगत फादर फुलजेंस प्रेमचंद कुल्लू का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ. मौके पर बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग, पुरोहित व धर्मबहनें उपस्थित रहीं. इस दौरान पूरे वातावरण में शोक और श्रद्धा का माहौल व्याप्त था. अंतिम संस्कार से पूर्व चर्च परिसर में विशेष मिस्सा अनुष्ठान आयोजित किया गया, जिसकी अगुवाई सिमडेगा धर्मप्रांत के बिशप विंसेंट बरवा ने की. इस दौरान वीजी फादर इग्नासियुस टेटे, फादर पीटर मिंज, फादर थॉमस समेत अन्य पुरोहितों ने सहयोग किया. अपने प्रवचन में बिशप ने कहा कि फादर फुलजेंस का जीवन समाप्त नहीं हुआ, बल्कि वे अनंत जीवन में प्रवेश कर गये हैं. उन्होंने कहा कि ईश्वर में विश्वास रखने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद भी जीवित रहता है. साथ ही उन्होंने मसीही समाज से कलीसिया के प्रति दृढ़ विश्वास बनाये रखने और उसके विकास में योगदान देने का आह्वान किया. उन्होंने फादर फुलजेंस के जीवन को निष्ठा, अनुशासन और समर्पण का उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके कार्य सदैव सफल रहे. उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सभी को कलीसिया के विकास में योगदान देना चाहिए. अंत में उन्होंने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दिवंगत आत्मा के पुण्य कार्यों से धर्मप्रांत हमेशा आलोकित रहेगा. अंतिम संस्कार के दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी और उनके निधन को धर्मप्रांत के लिए अपूरणीय क्षति बताया. कुरडेग पारिश अंतर्गत छाताकाहू गांव निवासी फादर फुलजेंस प्रेमचंद कुल्लू के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है. उनका जन्म स्व खोंडला कुल्लू और डेली कुल्लू इंदवार के घर हुआ था. वे अपने भाई-बहनों में पांचवें स्थान पर थे. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा आरसी मवि खलीजोर से प्राप्त की. इसके बाद सेंट मेरीज हाई स्कूल, सामटोली से मैट्रिक, सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से इंटरमीडिएट तथा संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची से दर्शनशास्त्र एवं ईशशास्त्र की पढ़ाई पूरी की. तीन मई 1986 को कुरडेग में आर्चबिशप तेलेस्फोर पी टोप्पो द्वारा उनका पुरोहिताभिषेक किया गया. अपने 40 वर्षों के पुरोहित जीवन में उन्होंने रांची, गुमला और सिमडेगा धर्मप्रांत के विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दीं. वे रांची महागिरजाघर में सहायक पल्ली पुरोहित, कोनबीर नवाटोली में सेवक, बारवे हाई स्कूल (चैनपुर) में शिक्षक, अपोस्तोलिक स्कूल में निदेशक, संत पीयूष इंटर कॉलेज रेंगारिह में प्राचार्य, विकास केंद्र सिमडेगा में निदेशक तथा संत दोमनिक इंटर कॉलेज लचरागढ़ में लंबे समय तक प्राचार्य रहे. इसके अलावा वे धर्मप्रांतीय शिक्षा निदेशक और संत अन्ना कॉलेज हॉस्टल के अधीक्षक के रूप में भी कार्यरत थे. फादर फुलजेंस अपने कर्मठ, जुझारू, मिलनसार, अनुशासनप्रिय और दूरदर्शी व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे. शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा.

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By Prabhat Khabar News Desk

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