78 साल बाद भी लोग लालटेन युग में जीने को विवश लोग, सिर्फ मीटर मिली बिजली नहीं

कोलेबिरा के जिल्पी टोली और नदीदीपा गांव के लोग आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जानिए क्या है ग्रामीणों की समस्या।

सिमडेगा(कोलेबिरा). जिल्पी टोली व नदीदीपा गांव में लोग लालटेन युग में जीने को विवश कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत नवाटोली पंचायत के जिल्पी टोली एवं नदीदीपा गांव में देश के आजादी के 78 वर्षगांठ बीत जाने के बाद भी इन टोलों में निवास करने वाले ग्रामीण सरकारी घोषणाओं के बावजूद आज भी लालटेन युग में जीने के लिए विवश है.

गांवों में करीब 50 से 55 परिवार

कोलेबिरा प्रखंड मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर और जिला मुख्यालय से लगभग 43 किलोमीटर दूर पहाड़ों के बीच बसे इन गांवों में करीब 50 से 55 परिवार रहते हैं. ग्रामीणों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि और वन उत्पादों पर निर्भर है. गांव में बिजली नहीं रहने के कारण ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

शाम होते ही छा जाता है अंधेरा

शाम होते ही अंधेरा छा जाता है और जंगली जानवरों का खतरा बढ़ जाता है. ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय हाथी सहित अन्य जंगली जानवर गांव के आसपास पहुंच जाते हैं और कई बार पालतू पशुओं को अपना शिकार बना लेते हैं. इससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. जंगली जानवरों की आवाज और उनकी मौजूदगी के कारण लोग रात में घरों से निकलने में भी डरते हैं.

पढ़ाई में भी परेशानी

बिजली नहीं होने का सबसे अधिक असर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है. शाम के बाद घरों में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रहती, जिससे बच्चों को पढ़ाई करने में परेशानी होती है. ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में मोबाइल, इंटरनेट और अन्य जरूरी सुविधाएं भी बिजली के अभाव में पूरी तरह प्रभावित हैं.

पांच साल पहले मिला मीटर, नहीं पहुंची बिजली

ग्रामीणों ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले बिजली विभाग अथवा संबंधित ठेकेदार द्वारा प्रत्येक घर में बिजली का मीटर लगाया गया था. उस समय ग्रामीणों को बताया गया था कि एक महीने के भीतर गांव में बिजली पहुंचा दी जाएगी. बिजली आपूर्ति की तैयारी भी शुरू की गयी थी, लेकिन मीटर लगाए जाने के पांच वर्ष बाद भी घरों में बिजली नहीं पहुंची. इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी है.

सिर्फ मिलता हैं आश्वासन

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और जनप्रतिनिधि गांव पहुंचकर बिजली समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हैं और वोट मांगते हैं. चुनाव समाप्त होने के बाद वादे भुला दिये जाते हैं. ग्रामीणों के अनुसार, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी से भी कई बार गांव में बिजली पहुंचाने की मांग की गयी, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ.

वर्तमान विधायक से कई बार आग्रह

ग्रामीणों ने यह भी बतलाया की कोलेबिरा के वर्तमान विधायक नमन विक्सल कोगाड़ी से उन लोगों के द्वारा गांव में बिजली पहुंचाने के लिए कई बार आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने इस ओर को ध्यान नहीं दिया. ग्रामीणों का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार की ओर से गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने के दावे किये जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग है. दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में बसे गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

आठ टोलों में बिजली नहीं

नवाटोली पंचायत की मुखिया कल्पना देवी ने बताया कि पंचायत के आठ टोलों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है. उन्होंने कहा कि जिल्पी गांव में जल्द ही बिजली पहुंचने की उम्मीद है. विभाग की ओर से गांव में बिजली के खंभे लगाने का काम किया जा रहा है. विद्युत विभाग के कर्मियों ने भी बताया कि गांव में बिजली के खंभे लगाए जा चुके हैं और जल्द ही बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जायेगी.

मीटर मिलने के बावजूद घरों में बिजली नहीं

ग्रामीण लिली प्रभा, कुंवारी डुंगडुंग, वेरोनिका डुंगडुंग, एमरेंसिया डुंगडुंग, प्रभा डुंगडुंग, असीना डुंगडुंग, कालू मुंडा, सुरसेन सुरीन, जुसपा डुंगडुंग, अजीत सुरीन, बैसाखू मुंडा समेत अन्य ने बताया कि पांच वर्ष पहले मीटर मिलने के बावजूद उनके घरों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है


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लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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