कोलेबिरा. कोलेबिरा में गर्मी का मौसम शुरू होते मिट्टी के घड़ों की मांग बढ़ गयी है, लेकिन दूसरी ओर कुम्हारों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाने से वे परेशान हैं. घड़ा बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि अब चिकनी मिट्टी आसानी से उपलब्ध नहीं होती. उन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों से मिट्टी लानी पड़ती है, जिससे समय और श्रम दोनों बढ़ जाते हैं. इसके अलावा घड़ा पकाने के लिए लकड़ी भी महंगी हो गयी है. एक भार लकड़ी खरीदने में उन्हें 150 से 200 रुपये तक खर्च करना पड़ता है. स्थानीय कुम्हार ननकू महतो ने बताया कि एक घड़ा तैयार करने में काफी मेहनत और लागत लगती है, लेकिन बाजार में इसकी कीमत नहीं मिल पाती. लोग एक घड़े के लिए मुश्किल से 100 से 120 रुपये ही देते हैं, जिससे लागत निकालना भी कठिन हो जाता है. वहीं, सुमित्रा देवी ने कहा कि घड़ा बनाने का काम बेहद मेहनत भरा है. मिट्टी तो किसी तरह मिल जाती है, लेकिन लकड़ी जुटाना सबसे बड़ी चुनौती है और इसके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है. उन्होंने कहा कि वे अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण भविष्य में यह काम करना मुश्किल हो सकता है.
गर्मी में बढ़ी घड़े की मांग, पर उचित दाम नहीं मिलने से कुम्हार परेशान
मिट्टी व लकड़ी की बढ़ती लागत से बढ़ी मुश्किलें, मेहनत के बावजूद नहीं मिल रहा सही मूल्य
