कभी मजदूरी पर निर्भर था परिवार, अब बतख-बकरी पालन से दयामनी की 94,600 रुपए की कमाई

सिमडेगा की दयामनी किंडो ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बतख और बकरी पालन से 94,600 रुपये की कमाई की. जानिए उनकी प्रेरणादायक सफलता की पूरी कहानी.

मो. इलियास की रिपोर्ट

सिमडेगाः केरसई प्रखंड के टैसेर पश्चिमी पंचायत अंतर्गत पथरीटोली गांव की दयामनी किंडो ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी पारिवारिक आजीविका को नई दिशा दी है. पति सुनीत किंडो के साथ सीमित संसाधनों में जीवन-यापन करने वाली दयामनी अब बतख पालन, बकरी पालन, कृषि और कैडर गतिविधियों के माध्यम से आय के कई स्रोत विकसित कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं.

वर्ष 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं

दयामनी किंडो वर्ष 2020 में जेएसएलपीएस के अंतर्गत कमल स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं. समूह की सदस्य बनने के बाद उन्होंने नियमित रूप से बैठकों में भाग लिया और बचत समेत विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभायी. उनकी सक्रियता और कार्य के प्रति रुचि को देखते हुए उन्हें बागवानी सखी कैडर की जिम्मेदारी भी दी गयी. इस भूमिका के माध्यम से कृषि और आजीविका संबंधी गतिविधियों में उनका अनुभव और मजबूत हुआ.

ऋण और मार्गदर्शन से बढ़े आजीविका के साधन

स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले दयामनी के परिवार की आजीविका मुख्य रूप से वर्षा आधारित धान की खेती, बकरी पालन और मजदूरी पर निर्भर थी. आय सीमित और अस्थिर होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना चुनौतीपूर्ण था. समूह से मिले ऋण, तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन ने दयामनी के लिए आजीविका के नये अवसरों का रास्ता खोला.

सितंबर 2025 में हार्डनिंग सेंटर/मदर यूनिट के माध्यम से उन्हें 40 बतख के चूजे मिले. इसके बाद उन्होंने बतख पालन के साथ बकरी पालन को भी विस्तार दिया. स्वयं सहायता समूह से छोटे और बड़े ऋण के रूप में कुल 32,000 रुपये लेकर उन्होंने इसे आजीविका गतिविधियों में लगाया.

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विभिन्न गतिविधियों से 94,600 रुपए की आय

मेहनत और बेहतर प्रबंधन का परिणाम अब सामने आने लगा है. दयामनी को अब तक बतख और अंडों की बिक्री से 20,000 रुपये, बकरी-खस्सी की बिक्री से 52,000 रुपये तथा कैडर और कृषि आधारित गतिविधियों से 22,600 रुपये की आय हुई है. इस तरह विभिन्न आजीविका गतिविधियों से उनकी कुल आय 94,600 रुपये तक पहुंच गयी है.

गांव की दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

दयामनी की सफलता अब गांव के अन्य परिवारों को भी प्रेरित कर रही है. उनकी गतिविधियों से प्रभावित होकर स्थानीय स्तर पर अन्य परिवार भी बतख पालन के साथ पशुपालन को अपनाने लगे हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के नये अवसर पैदा होने के साथ परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है.

दयामनी की दो पुत्रियां हैं, जो नजदीकी सरकारी विद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं. परिवार की आय बढ़ने से बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी सहूलियत हो रही है.

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दयामनी बोलीं- समूह से जुड़ने के बाद मिली नई राह

दयामनी किंडो का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव, समूह से प्राप्त ऋण, विभिन्न योजनाओं का सहयोग तथा जेएसएलपीएस के तकनीकी और संस्थागत मार्गदर्शन ने उनकी आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब उनका परिवार किसी एक आय स्रोत पर निर्भर नहीं है, बल्कि कृषि, पशुपालन, बतख पालन और कैडर आधारित कार्यों से आय के कई साधन विकसित कर रहा है.

दयामनी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल है. यह बताती है कि संगठित प्रयास, सामूहिक सहयोग, उचित मार्गदर्शन और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से महिलाएं न केवल परिवार की आय बढ़ा सकती हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अपने गांव की अन्य महिलाओं और परिवारों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं.


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लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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