सिमडेगा. आर्थिक तंगी ने पढ़ाई के रास्ते में भले ही मुश्किलें खड़ी कर दीं, लेकिन बानो प्रखंड के कौवाजोर गांव की अनिमा बागे ने अपने सपनों को कभी खत्म नहीं होने दिया. परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण इंटरमीडिएट के बाद उन्हें पढ़ाई रोकनी पड़ी. शिक्षक प्रशिक्षण की फीस, किताबें समेत अन्य शैक्षणिक खर्च जुटाना परिवार के लिए मुश्किल था.
सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना से मिला अवसर
ऐसे में अनिमा को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. अनिमा साधारण परिवार से आती हैं. उनके पिता सुखमन बागे और माता मुनिका बागे मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. सीमित आमदनी में घर का खर्च चलाना ही चुनौती था. इस दौरान अनिमा को सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना की जानकारी मिली. संबंधित विभाग और कर्मियों के सहयोग से उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया.
अधूरे सपने को फिर से पूरा करने का अवसर मिला
प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई. अनिमा के लिए यह राशि महज आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अधूरे सपने को फिर से पूरा करने का अवसर बनी. वर्ष 2025 की शुरुआत में उन्होंने रांची स्थित एसपीजी महिला प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में नामांकन कराया. वर्तमान में वह नियमित रूप से शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं.
शिक्षक बन कर बच्चों को शिक्षित करने का सपना
अनिमा कहती हैं कि आर्थिक परिस्थितियों ने उनके सामने कई बाधाएं खड़ी कीं, लेकिन सरकारी सहायता मिलने के बाद उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने का अवसर मिला. अब उनका सपना शिक्षक बन कर बच्चों को शिक्षित करना और अपने परिवार का नाम रोशन करना है. अनिमा की कहानी बताती है कि जरूरतमंद बेटियों तक समय पर पहुंचने वाली सरकारी सहायता उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है.
सरकारी योजनाएं सही लाभुक तक पहुंची रही
सरकारी योजनाएं जब सही लाभुक तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक मदद नहीं देतीं, बल्कि सपनों को पूरा करने का रास्ता भी खोलती हैं. संघर्ष से शुरू हुई अनिमा की यह यात्रा अब संकल्प और सफलता की ओर बढ़ रही है.
