चांडिल-नीमडीह में जंगली हाथी का कहर, कई घर तोड़े, अनाज किया चट

चांडिल और नीमडीह में जंगली हाथी ने कई घरों को तोड़कर अनाज चट कर दिया. ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है.

चांडिल. चांडिल एवं नीमडीह प्रखंड में शनिवार की रात झुंड से बिछड़े एक जंगली हाथी ने जमकर उत्पात मचाया. हाथी ने सबसे पहले नीमडीह प्रखंड के बाना गांव में दो घरों को क्षतिग्रस्त किया. इसके बाद पितकी और रावताड़ा होते हुए चांडिल प्रखंड के सुखसारी, कांग्लाटांड़ और ससानटांड़ गांव पहुंचकर कई घरों, दुकान और अनाज को नुकसान पहुंचाया. पूरी रात ग्रामीण दहशत के साये में जागते रहे.

रात 8 बजे बाना में तोड़ा घर, 11 बजे सुखसारी पहुंचा हाथी

ग्रामीणों के अनुसार रात करीब आठ बजे हाथी बाना पहाड़ की ओर से बाना गांव पहुंचा. यहां राजीव महतो एवं युधिष्ठिर महतो के घरों को तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया. इसके बाद हाथी पितकी और रावताड़ा होते हुए सुखसारी गांव पहुंचा, जहां उसने एक के बाद एक कई घरों को निशाना बनाया. सुखसारी गांव में हाथी ने सबसे पहले छूटू महतो के घर की मिट्टी की दीवार तोड़ दी और घर में रखा दो बोरा चावल खा गया. इसके बाद गुणाधर महतो के घर पर हमला कर वहां रखा दो बोरा चावल भी चट कर गया. नेपाल चंद्र महतो के घर की दीवार तोड़ने के साथ बागान में लगे कटहल खा गया. लालू महतो की दुकान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया. दीवार गिरने से एक बाइक भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. तेज आवाज सुनकर परिवार के लोग किसी तरह घर से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे.

हाथी का आतंक यहीं नहीं रुका. ससानटांड़ गांव में सुरेश मुर्मू के घर में घुसकर रखा चावल खा गया. वहीं कांग्लाटांड़ गांव में डोमन सोरेन के घर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया. लगातार कई गांवों में हुए नुकसान से ग्रामीणों में भय का माहौल है.

ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया

ग्रामीणों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण मिट्टी के घर पहले से कमजोर हो चुके हैं. ऐसे में हाथी आसानी से दीवार तोड़कर घरों में घुस जा रहे हैं. दिनभर खेतों में धान रोपनी करने के बाद रातभर हाथियों की निगरानी करनी पड़ रही है, जिससे लोगों की नींद हराम हो गई है. घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना है कि सूचना देने के बावजूद एलिफेंट ड्राइव टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंची. ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग केवल आश्वासन देता है, जबकि हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों ने दलमा गज परियोजना पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि पिछले आठ-दस वर्षों से दलमा जंगल में हाथियों की संख्या कम दिखाई देती है, जबकि हाथियों का झुंड गांवों में लगातार तबाही मचा रहा है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए सोलर फेंसिंग, खाई, स्थायी एलिफेंट ट्रैकिंग टीम और अन्य सुरक्षा उपायों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने सुखसारी, कांग्लाटांड़, ससानटांड़ सहित आसपास के गांवों में 24 घंटे एलिफेंट ट्रैकिंग टीम की तैनाती, क्षतिग्रस्त घरों एवं अनाज का तत्काल मुआवजा तथा जंगल में हाथियों के लिए भोजन और पानी की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है. इधर वन विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों में पहुंचकर क्षति का आकलन शुरू कर दिया है. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी समाधान होने तक उनका भय समाप्त नहीं होगा.


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By Himanshu gope

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