सरायकेला : नीमडीह के 53 गांवों के ग्रामीण पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को पेसा कानून के तहत सरकारी मान्यता दिलाने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे. ग्रामीणों ने अपर उपायुक्त जयबर्द्धन कुमार और जिला पंचायत राज पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा. ग्रामीणों ने 49 गांवों में आपसी सहमति से चयनित पारंपरिक प्रधानों की सूची भी प्रशासन को दी. उन्होंने चयनित सरदार और मुंडाओं को ग्रामसभा के अध्यक्ष (प्रधान) के रूप में मान्यता देने और शपथ दिलाने की मांग की.
सरदार, मुंडा, नाया और डाकुआ का विवरण सौंपा
ग्रामीणों ने पेसा कानून की धारा-4 का हवाला देते हुए अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाज और स्वशासन व्यवस्था को संरक्षण देने का प्रावधान बताया. उन्होंने कहा कि नीमडीह में सदियों से चली आ रही व्यवस्था को प्रशासनिक अभिलेखों में दर्ज किया जाए. ग्रामीणों ने सरदार, मुंडा, नाया (पुजारी) और डाकुआ का संकलित विवरण भी सौंपा.
65 में से 53 गांव अभियान से जुड़े हैं
21 गांवों को मिलाकर एक गादी पीढ़ सरदार की सूची दी गयी है. ग्रामीणों के अनुसार प्रखंड के 65 गांवों में से 53 इस अभियान से जुड़े हैं और 49 में पारंपरिक पदाधिकारियों का चयन हो चुका है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक स्वशासन जल, जंगल, जमीन और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा से जुड़ा है. संयोजक मंडली में सुधाकर सिंह, वैधनाथ सिंह, भोलानाथ सिंह, मदन सिंह, इंद्रजीत सिंह व भानु सिंह समेत अन्य शामिल थे.
