रेशम किसान तकनीकी रूप से बनेंगे सक्षम : डॉ. दिव्या राजावत

भरभरिया में मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 कार्यक्रम आयोजित। रेशम किसानों को कीट रोगों की पहचान और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया।


खरसावां/चाईबासा: रेशम उत्पादन बढ़ाने और किसानों को रोग प्रबंधन की तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने के लिए मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 कार्यक्रम से अग्र परियोजना केंद्र भरभरिया में गुरुवार को पहला पायलट कार्यक्रम किया गया. इसकी अध्यक्षता केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रांची की वैज्ञानिक-बी सह जिला समन्वयक डॉ. दिव्या राजावत ने की. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम से रेशम किसानों तकनीकी रूप से सक्षम बनेंगे. वे उत्पादन बढ़ाने के साथ रेशम कीटों में होने वाले रोगों की पहचान और प्रबंधन की तकनीक अपना सकेंगे.

पेब्रीन रोग की पहचान का मिला प्रशिक्षण

किसानों को विशेष रूप से पेब्रीन रोग की पहचान और मॉथ परीक्षण की व्यावहारिक जानकारी दी. मातृ-पतंगा के चयन से लेकर स्लाइड तैयार करने, नमूना लेते समय संक्रमण से बचाव, माइक्रोस्कोप की स्थापना और संचालन व पेब्रीन की पहचान की प्रक्रिया का क्रमवार प्रदर्शन किया गया. किसानों ने माइक्रोस्कोप से परीक्षण प्रक्रिया को समझा और पेब्रीन रोग की पहचान का अभ्यास किया.

स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावना बढ़ी

बताया गया कि मॉथ परीक्षण की तकनीक में स्थानीय स्तर पर दक्षता विकसित होने से भविष्य में किसानों और रेशमदूतों के लिए कौशल आधारित आय के अवसर विकसित हो सकते हैं. इससे रेशम उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार के साथ किसानों को तकनीकी रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी. मौके पर अग्र परियोजना पदाधिकारी प्रदीप महतो, सहायक सचिव कच्चा माल बैंक (चाईबासा) राम मोहन प्रमाणिक, सेवानिवृत्त राज्य पर्यवेक्षक आरसी यादव आदि उपस्थित थे.


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By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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