इंडोनेशिया में छाया सरायकेला छऊ नृत्य, वैश्विक मंच पर बिखरी कला की छटा

इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में सरायकेला छऊ नृत्य ने अपनी अनूठी कला और संस्कृति से वैश्विक मंच पर भारत का मान बढ़ाया है.

सरायकेला: सरायकेला की समृद्ध संस्कृति और दुनिया भर में पहचान रखने वाले छऊ नृत्य की खास शैली ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोगों का ध्यान खींचा. पांच से आठ अगस्त तक जकार्ता में हुए इंटरनेशनल सेमिनार एंड फेस्टिवल ऑफ ओरल ट्रेडिशंस में श्री केदार आर्ट सेंटर, सरायकेला के गुरु मलय कुमार साहू और अमित कुमार साहू ने सरायकेला छऊ की शानदार प्रस्तुति दी. इस प्रस्तुति के जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की लोक और पारंपरिक कला की खूबसूरती को पेश किया.

छऊ की भाव-भंगिमा, नृत्य शैली और पारंपरिक प्रस्तुति ने विदेशी दर्शकों एवं विभिन्न देशों से पहुंचे विद्वानों और कलाकारों का ध्यान आकर्षित किया तथा कलाकारों ने खूब वाहवाही बटोरी.यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन एसोसिएशन ऑफ ओरल ट्रेडिशंस, जकार्ता, स्थानीय प्रशासन तथा इंडोनेशिया के शिक्षा, संस्कृति, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया. महोत्सव में दुनिया के विभिन्न देशों के विद्वान, शोधकर्ता, सांस्कृतिक विशेषज्ञ और पारंपरिक कलाकार शामिल हुए. आयोजन का मुख्य उद्देश्य मौखिक परंपराओं तथा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और आने वाली पीढ़ियों तक उसके हस्तांतरण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद स्थापित करना था.

सरायकेला छऊ पर गुरु मलय साहू ने दिया व्याख्यान

महोत्सव में नृत्य प्रस्तुति के साथ अकादमिक चर्चा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी आयोजन किया गया. इस दौरान गुरु मलय कुमार साहू ने सरायकेला छऊ की उत्पत्ति, परंपरा, विशिष्ट नृत्य शैली, अभिनय, संगीत, वेशभूषा और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से व्याख्यान दिया. उन्होंने बताया कि सरायकेला छऊ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक है. अंतरराष्ट्रीय मंच पर सरायकेला छऊ की विशिष्ट पहचान और इसकी परंपरागत शैली को सामने रखने का अवसर कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण रहा. विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों ने छऊ की प्रस्तुति और इसकी परंपरागत विशेषताओं में विशेष रुचि दिखाई.

पद्मश्री स्वर्गीय गुरु केदारनाथ साहू के पुत्र हैं मलय साहू

गुरु मलय कुमार साहू पद्मश्री स्वर्गीय गुरु केदारनाथ साहू के पुत्र हैं.उन्हें सरायकेला छऊ की कला और परंपरा विरासत में मिली है, वे लंबे समय से इस कला के संरक्षण, प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहे हैं. देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी वे सरायकेला छऊ की विशिष्ट शैली को प्रस्तुत करते रहे हैं.जकार्ता में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अपने पिता एवं गुरुजनों से मिली कला परंपरा को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया, वहीं अमित कुमार साहू ने भी सरायकेला छऊ की पारंपरिक शैली में प्रस्तुति देकर इस कला की विविधता और सौंदर्य से लोगों को परिचित कराया.

छऊ हमारी सांस्कृतिक पहचान है’ : मलय

गुरु मलय कुमार साहू ने दूरभाष पर प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि “सरायकेला छऊ सिर्फ एक नृत्य नहीं, बल्कि हमारी पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक आत्मा है. इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना हमारे लिए गौरव की बात है. ऐसे आयोजनों के माध्यम से दुनिया के लोगों को सरायकेला छऊ की परंपरा और इसकी विशेषताओं को समझने का अवसर मिलता है.उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर छऊ की प्रस्तुति से इस कला के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ेगी और इसके संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी. उन्होंने युवाओं को इस पारंपरिक कला से जोड़ने और नई पीढ़ी तक इसकी विरासत पहुंचाने पर भी जोर दिया.

छऊ कला के संरक्षण व संवर्धन में जुटा है श्री केदार आर्ट सेंटर

श्री केदार आर्ट सेंटर, सरायकेला लंबे समय से सरायकेला छऊ के संरक्षण, प्रशिक्षण और देश-विदेश में प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहा है. सेंटर के माध्यम से नई पीढ़ी के कलाकारों को छऊ नृत्य की पारंपरिक शैली और तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाता है, साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच उपलब्ध कराकर कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाता है.

गुरु मलय कुमार साहू और अमित कुमार साहू द्वारा जकार्ता में सरायकेला छऊ की प्रस्तुति दिए जाने पर सरायकेला के कला प्रेमियों, कलाकारों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. लोगों ने कहा कि जकार्ता के अंतरराष्ट्रीय मंच पर सरायकेला छऊ की प्रस्तुति पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है.


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लेखक के बारे में

By प्रताप कुमार मिश्रा

प्रताप कुमार मिश्रा वर्ष 2003 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने कोल्हन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है. राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, खेल की खबरों में इन्हें विशेषज्ञता हासिल है. डिजिटल जर्नलिज्म में 10 साल का अनुभव है.

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