सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela Water Crisis: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड की बंदोलोहार पंचायत अंतर्गत पुतुलपीढ़ गांव में आदिवासी यात्रा के तहत पानी की समस्या को लेकर विशेष बैठक आयोजित की गई. बैठक में युवाओं, बुजुर्गों एवं महिलाओं ने समूह चर्चा के माध्यम से गांव का पानी संसाधन की मैपिंग को तैयार किया. इस दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में मौजूद जल संकट से जुड़े अलग-अलग मुद्दों को भी चिन्हित किया.
खराब चापाकलों से लेकर तालाबों और नहरों की स्थिति का किया आकलन
ग्रामीणों ने जल संसाधन मैप में खराब चापाकलों की मरम्मत, सिंचाई के लिए नहरों के गहरीकरण, कुओं की मरम्मत और तालाबों की स्थिति को चिह्नित किया. इसके अलावा जलमीनारों की वर्तमान स्थिति को भी चिह्नित किया. साथ ही पीने के पानी और सिंचाई से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर विचार-विमर्श किया गया.
जल स्रोतों को संस्कृति और परंपरा से जोड़ने पर दिया गया जोर
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि जल स्रोतों का स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से गहरा संबंध रहा है. उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी इन सांस्कृतिक मूल्यों से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है. बैठक में ग्रामीणों ने पानी के स्रोतों की पवित्रता और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित रखने की जरूरत पर बल दिया.
बैठक में कई में ग्रामीण हुए शामिल
बैठक की अध्यक्षता मनोज कुमार बांदिया ने की. कार्यक्रम में फूलमती बांदिया, सीता बांदिया, जवांई बांदिया, शांति बांदिया, गीत कुई, जेमा कुई, मकी केराई, सुरु बांदिया, आशा बांदिया, बीरशा बांदिया, संजय बांदिया, मानकी सामाड, केनटो बांदिया, सागर बांदिया, कृष्ण बांदिया, दिसंबर सोय, विजय बांदिया, सदन बांदिया, कुरसो बांदिया, डीवर बांदिया, सतीश बांदिया, मनोज कुमार सोय, श्याम सोय और मान सिंह बांकीरा सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.
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