Republic Day 2026: झारखंड के सरायकेला में सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह पूरे हर्षोल्लास और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह स्कूल के भैया-बहनों के घोष वादन के साथ प्रभात फेरी निकालकर की गई. प्रभात फेरी नगर भ्रमण करते हुए स्कूल कैंपस पहुंची, जहां वातावरण भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा.
भारत माता पूजन के बाद हुआ झंडोत्तोलन
प्रभात फेरी के बाद आने वाले गेस्ट ने भारत माता का पूजन किया. इसके बाद स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन रमानाथ आचार्य जी ने ध्वजारोहण किया. जैसे ही तिरंगा फहराया गया, पूरा कैंपस देशभक्ति गीतों और नारों से गूंज उठा. कैंपस में मौजूद लोगों ने राष्ट्रध्वज को सलामी दी.
राष्ट्र सर्वोपरि का भाव हर नागरिक में होना चाहिए: रमानाथ आचार्य
झंडोत्तोलन के बाद कमेटी के चेयरमैन रमानाथ आचार्य जी ने मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान न्याय, समता और स्वतंत्रता का प्रतीक है. आज भारत विश्व पटल पर तेजी से उभर रहा है और पूरी दुनिया हमारी ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है. उन्होंने स्टूडेंट्स से अपील की कि वे खूद को योग्य, चरित्रवान और देशभक्त नागरिक बनाएं, क्योंकि राष्ट्र का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है.
स्टूडेंट्स ने तीन लैंग्वेज में दिया भाषण
प्रोग्राम में बहन आभ्रा भूपक ने संस्कृत में, नूपुर महापात्र ने अंग्रेजी में और अष्टमी महतो ने हिंदी में प्रभावशाली भाषण दिया. इन भाषणों में देश की संस्कृति, संविधान और युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया. स्टूडेंट्स की प्रस्तुतियों को लोगों ने खूब सराहा.
बच्चों ने दिखाया आकर्षक पिरामिड, आर्टिस्ट को मिला अवॉर्ड
इस अवसर पर स्कूल के बच्चों की ओर से फिजिकल बैलेंस पर आधारित आकर्षक पिरामिड प्रदर्शन भी किया गया, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया. इवनिंग के कल्चरल प्रोग्राम में भाग लेने वाले आचार्य दीदी जी को अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया. साथ ही प्रसिद्ध आर्टिस्ट और सिंगर संजय पति जी को भी स्पेशल अवॉर्ड प्रदान किया गया.
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वंदे मातरम के साथ प्रोग्राम का समापन
स्कूल के प्रिंसिपल पार्थ सारथी आचार्य जी ने सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं. प्रोग्राम के आखिर में सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत वंदे मातरम गीत के साथ समापन हुआ. इस अवसर पर वाइस प्रिंसिपल तुषार कांत पति, सभी आचार्य दीदी, गार्जियन और बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स मौजूद रहे.
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