Seraikela Kharsawan News : आखिरी बार पत्नी से की थी बात, घर लौटने पर समिति का कर्ज चुका दूंगा

भिवाड़ी धंसान हादसा में ईचागढ़ के दो सिविल मिस्त्री की भी गयी जान, परिवारों पर आया संकट

चांडिल/चौका. हरियाणा के भिवाड़ी स्थित दिल्ली-जयपुर हाइवे (कापड़ियावासा) पर सिग्नेचर ग्लोबल साइट पर निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी धंसने की घटना में ईचागढ़ (चांडिल) थाना क्षेत्र के हुंडी गांव निवासी सिविल मिस्त्री परमेश्वर महतो (52) की भी जान चली गयी. परिजनों ने बताया कि बीते रविवार को परमेश्वर ने फोन पर अपनी पत्नी पुष्पलता महतो से आखिरी बार बात की थी. उन्होंने कहा था कि समिति से कुछ कर्ज लिया है, जिसे इस बार घर लौटने पर चुका देंगे. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी. परमेश्वर महतो अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे.

जनवरी में घर आये थे, फरवरी में फिर चले गये:

वे वर्ष 2015 से दूसरे राज्यों में सिविल मिस्त्री का काम कर रहे थे. जनवरी, 2026 में घर लौटे थे, लेकिन फरवरी के अंतिम सप्ताह में काम के सिलसिले में दोबारा हरियाणा चले गये थे. उनकी मजदूरी से घर का खर्च व दोनों बेटों की पढ़ाई चल रही थी. बड़ा बेटा एमएससी-बीएड व छोटा मैकेनिकल डिप्लोमा कर रहा

परमेश्वर महतो अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर बेहद सजग थे. उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से बड़े बेटे तपन महतो को एमएससी और बीएड कराया, जबकि छोटा बेटा सपन महतो फिलहाल मैकेनिकल डिप्लोमा कर रहा है.

गांव में मातम, शव लाने हरियाणा गया बड़ा बेटा:

घटना की खबर मिलते ही हुंडी गांव में सन्नाटा पसर गया है. पत्नी और छोटे बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है. वे फिलहाल अपने मायके (बड़ामटांड़, चौका) चले गए हैं. वहीं, बड़ा बेटा तपन महतो अपने पिता का पार्थिव शरीर घर लाने के लिए हरियाणा रवाना हो गया है.

चांडिल डैम से विस्थापित हुआ शिव शंकर का परिवार, करना पड़ा पलायन

चांडिल/चौका. हरियाणा के भिवाड़ी में दिल्ली-जयपुर हाइवे स्थित कापड़ियावासा में सिग्नेचर ग्लोबल साइट पर खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने की घटना में ईचागढ़ के विस्थापित गांव बुरुहातु निवासी शिवशंकर सिंह मुंडा की भी जान चली गयी. घटना से पूरे गांव में मातम पसरा है. मृतक के बड़े भाई सीमंत सिंह मुंडा ने बताया कि मंगलवार देर रात फोन पर उन्हें शिवशंकर की मौत की जानकारी मिली. सूचना मिलते ही हरियाणा के पास रहने वाले गांव के एक भतीजे को अस्पताल भेजा गया है. वह वहां पहुंचकर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रहा है.

विस्थापन का दंश झेल रहा परिवार

परिजनों ने बताया कि चांडिल डैम निर्माण के दौरान उनका गांव विस्थापित हो गया था. खेती की अधिकांश जमीन डैम में डूब जाने के कारण परिवार के पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचा. इसी मजबूरी के कारण शिवशंकर पिछले 10 वर्षों से विभिन्न राज्यों में सिविल मिस्त्री के रूप में काम कर रहे थे. वह अक्सर ठेकेदार के बुलावे पर बाहर काम करने चले जाते थे.

वृद्ध पिता व भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल हुआ :

मृतक शिवशंकर सिंह मुंडा (अविवाहित) अपने चार भाइयों में मंझले थे. उनके परिवार में पिता सुकु सिंह मुंडा और भाई सीमंत, लालु व राधानाथ सिंह मुंडा हैं. उनकी माता का निधन पहले ही हो चुका है. घर का एक कमाऊ सदस्य खोने से वृद्ध पिता और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल है. बुरुहातु गांव शोक में है. ग्रामीण व परिजन शिवशंकर के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं. ग्रामीणों ने विस्थापितों की दुर्दशा और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गहरा दुख व्यक्त किया है

विधायक सविता और संजीव ने मंत्री से शवों को लाने और मुआवजे की मांग की

चांडिल. हरियाणा के भिवाड़ी में निर्माणाधीन साइट पर मिट्टी धंसने से झारखंड के मजदूरों की मौत का मामला तूल पकड़ चुका है. ईचागढ़ की विधायक सविता महतो और पोटका विधायक संजीव सरदार ने विधानसभा सत्र के दौरान श्रम मंत्री संजय यादव से मुलाकात कर घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और त्वरित कार्रवाई की मांग की. विधायकों ने मंत्री से आग्रह किया कि मृतकों के शवों को उनके गृह क्षेत्र ईचागढ़ और पोटका लाने की अविलंब व्यवस्था की जाये. विधायक सविता महतो ने विशेष रूप से मांग की कि हादसे के लिए जिम्मेदार सिग्नेचर ग्लोबल सोसाइटी और संबंधित निर्माण कंपनी से पीड़ित परिवारों को भारी मुआवजा दिलाया जाये.श्रम मंत्री संजय यादव ने विधायकों को आश्वस्त किया कि सरकार की पहली प्राथमिकता शवों को सम्मानजनक तरीके से रांची मंगवाना है. वहां से एंबुलेंस के जरिए शवों को उनके पैतृक गांवों (बनगोड़ा, बुरुहातू और हुंडी) तक पहुंचाया जायेगा. मंत्री ने यह भी भरोसा दिया कि मुआवजे की प्रक्रिया को त्वरित गति से पूरा कराया जायेगा. विधायक सविता महतो के आप्त सचिव राजीव कुमार महतो (काबलू) ने बताया कि प्रशासन लगातार हरियाणा सरकार के संपर्क में है.

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By Atul pathak

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