झारखंड के सरायकेला-खरसावां में गणतंत्र दिवस का आयोजन, सिविल कोर्ट और जेल में लगी अदालत

Saraikela Kharsawan News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिला मुख्यालय में 77वें गणतंत्र दिवस का आयोजन गरिमामय माहौल में हुआ, जहां सिविल कोर्ट में ध्वजारोहण, जिला जेल में जेल अदालत, चिकित्सा जांच शिविर और विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए. कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामाशंकर सिंह, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लूसी सोसेन टिग्गा सहित कई न्यायिक अधिकारी शामिल रहे. जेल अदालत में छह मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें चार बंदियों को रिहाई मिली. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें.

Saraikela Kharsawan News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में 77वां गणतंत्र दिवस भव्य और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया गया. इस अवसर पर ध्वजारोहण समारोह, जेल अदालत, चिकित्सा जांच शिविर और विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए. प्रोग्राम में न्यायपालिका, जिला बार एसोसिएशन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे.

सिविल कोर्ट परिसर में ध्वजारोहण

गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत सिविल कोर्ट परिसर, सरायकेला-खरसावां में ध्वजारोहण के साथ हुई. इस अवसर पर रामाशंकर सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया. ध्वजारोहण समारोह में अन्य न्यायिक पदाधिकारी और जिला बार एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित रहे. समारोह ने गणतंत्र दिवस के महत्व और संविधान के मूल्यों को नागरिकों के बीच जागरूक करने का संदेश दिया.

जेल अदालत और विधिक जागरूकता कार्यक्रम

ध्वजारोहण के बाद मंडलीय कारागार, सरायकेला में जेल अदालत-सह-चिकित्सा जांच शिविर एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. यह कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित किया गया. कार्यक्रम का संचालन रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में और अनामिका किस्कू, सचिव डीएलएसए (प्रभारी) के पर्यवेक्षण में किया गया. जेल अदालत में श्रीमती लूसी सोसेन टिग्गा, माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, और अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे.

बंदियों को प्रेरित करने का संदेश

एसडीजेएम आशीष अग्रवाल ने कैदियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए 26 जनवरी 1950 के ऐतिहासिक महत्व, संविधान के मूल्यों और न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने कैदियों को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने कैदियों से संवाद कर उनकी विधिक सहायता और प्रतिनिधित्व की स्थिति की जानकारी ली. जेल अधीक्षक ने कार्यक्रम की मेजबानी की और सभी गतिविधियों का समन्वय किया.

खेल प्रतियोगिताओं और सम्मान

जेल में आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बंदियों को न्यायिक पदाधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया. जेल परिसर की स्वच्छता बनाए रखने में योगदान देने वाले कैदियों को भी पदक प्रदान किए गए. जेल अदालत में कुल 06 आवेदन सुनवाई के लिए लिए गए, जिनमें से 04 कैदियों को रिहा किया गया, जो कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही.

महिला बंदियों के लिए विशेष कार्यक्रम

न्यायिक पदाधिकारियों ने महिला वार्ड का भ्रमण कर महिला कैदियों से संवाद किया. महिला कैदियों द्वारा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई, जिससे कार्यक्रम भावनात्मक और प्रेरणादायक बना. विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने वाली महिला कैदियों को सम्मानित किया गया. अनामिका किस्कू ने कैदियों को फ्री विधिक सहायता और अन्य कानूनी अधिकारों की जानकारी दी. उन्होंने पैरा लीगल वालंटियर्स को मामलों की सतत निगरानी करने का निर्देश भी दिया.

नालसा वीपीएसवाई 2025 के तहत जागरूकता कार्यक्रम

इस अवसर पर नालसा, नई दिल्ली और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के निर्देशानुसार नालसा वीर परिवार सहायता योजना (वीपीएसवाई) 2025 के तहत प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए. यह पहल पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए समर्पित है.

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संविधान, न्याय और समावेशी समाज के लिए प्रतिबद्धता

यह आयोजन संविधान की भावना, न्याय, सुधार और समावेशी समाज के निर्माण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. जेल अदालत, खेल, शिक्षा और विधिक जागरूकता के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि कैदियों और समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और अधिकार प्राप्त हों.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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